सरकारी डॉक्टरों की बेहतरी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिया संदेश, नौकरी और पढ़ाई दोनों कर रहे उम्मीदवारों को फायदा
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा है कि नौकरी और पढ़ाई दोनों कर रहे सरकारी डॉक्टरों के लिए कटऑफ कम किया जाना चाहिए। कोर्ट ने तर्क दिया है कि इससे सरकारी डॉक्टरों को बेहतर सेवा प्रदान करने में मदद मिलेगी।

सौजन्य से:- Navbharat Times
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि सरकारी डॉक्टरों को सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल कोर्स आसानी से उपलब्ध कराए जाने चाहिए। आइए जानते हैं NEET SS कटऑफ से जुड़ा पूरा मामला।
NEET SS कटऑफ से जुड़ा मामला क्या है?
सुप्रीम कोर्ट (SC) ने एक याचिका पर नोटिस जारी किया है। इस याचिका में तमिलनाडु सरकार को 'इन-सर्विस' (सरकारी सेवा में कार्यरत) डॉक्टरों के लिए आरक्षित 152 खाली सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल सीटों (शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए) को ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में सौंपने से रोकने की मांग की गई थी। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने अधिकारियों को अपना जवाब फाइल करने का निर्देश दिया। SC ने कहा- SS ट्रेनिंग से स्किल्ड होकर बेहतर सेवा कर पाएंगे सरकारी डाॅक्टर्स
Livelaw की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने इस बात पर जोर दिया कि अगर सरकारी डॉक्टर सुपर-स्पेशियलिटी (SS) ट्रेनिंग से बेहतर स्किल हासिल करते हैं तो वे प्राइवेट डॉक्टरों की तुलना में पब्लिक हेल्थ सिस्टम की सेवा कहीं ज्यादा बेहतर कर पाएंगे। जस्टिस नागरत्ना ने यह सवाल भी उठाया कि असल में कितने लोग प्राइवेट अस्पतालों में इलाज का खर्च उठा सकते हैं।सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट पी. विल्सन (याचिकाकर्ताओं की ओर से) ने कोर्ट को बताया कि पोस्ट-ग्रेजुएट सीटों के लिए परसेंटाइल कम कर दिया गया है लेकिन सुपर-स्पेशियलिटी सीटों के लिए काउंसलिंग का दूसरा राउंड नहीं हुआ है। उन्होंने तर्क दिया कि काउंसलिंग का दूसरा राउंड पूरा होने और क्वालिफाइंग परसेंटाइल कम करने पर अंतिम फैसला लिए बिना 152 SS सीटों को ऑल इंडिया कोटा के माध्यम से भरने की अनुमति देने से इन-सर्विस सरकारी डॉक्टरों को गंभीर नुकसान होगा।
जस्टिस नागरत्ना बोले- ‘सरकारी डाॅक्टरों के लिए कम होनी चाहिए कटऑफ’
इसके जवाब में जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि ऑल इंडिया कोटा, यानी इन-सर्विस उम्मीदवार नहीं...परसेंटाइल कम करना होगा क्योंकि वे काम कर रहे हैं।- जस्टिस ने कहा कि सेवा कर रहे सरकारी डॉक्टरों के लिए कम कट-ऑफ निर्धारित की जानी चाहिए।
- हर राज्य में नौकरी कर रहे उम्मीदवार होते हैं। वे सरकारी डॉक्टर होते हैं। वे पब्लिक हेल्थ के लिए काम करते हैं। उनके लिए कट-ऑफ कम होना चाहिए। वजह यह है कि वे नौकरी और पढ़ाई दोनों कर रहे हैं।
- दूसरी तरफ ऐसे छात्र हैं जो PG डिप्लोमा वगैरह के लिए घर पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। वे नौकरी नहीं कर रहे होते।
- इन-सर्विस (नौकरी कर रहे डॉक्टरों) का रास्ता अलग है। अगर आप इसे खत्म कर देंगे तो राज्य के डॉक्टरों को क्या फायदा होगा? यह राज्य के लोगों... पब्लिक हेल्थ के लिए है। वे सभी राज्य सरकार के अस्पतालों में काम कर रहे हैं।
- आप बस उन्हें बेहतर स्किल... सुपर-स्पेशियलिटी हासिल करने का मौका देते हैं। मेरे हिसाब से, उनके लिए कट-ऑफ कम होना चाहिए क्योंकि वे काम और पढ़ाई दोनों कर रहे हैं।
- अगर ऑल इंडिया कोटा इसे ले लेता है तो राज्य के डॉक्टरों को क्या मदद मिलती है?
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