PCPNDT अधिनियम के तहत पुलिस नहीं कर सकेगी जांच, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला - supreme court police cant investigate pcpndt act offenses news in hindi
PCPNDT अधिनियम के तहत पुलिस नहीं कर सकेगी जांच, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस गर्भधारण-पूर्व और प्रसव-पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम के तहत अपराधों की जांच नहीं कर सकती, ऐसे मामलों म…

सौजन्य से:- Jagran
PCPNDT अधिनियम के तहत पुलिस नहीं कर सकेगी जांच, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस गर्भधारण-पूर्व और प्रसव-पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम के तहत अपराधों की जांच नहीं कर सकती, ऐसे मामलों में नामित अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए।
HighLights
- पुलिस पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत अपराधों की जांच नहीं कर सकती।
- नामित अधिकारी ही ऐसे तकनीकी मामलों की जांच के लिए अधिकृत हैं।
- यह पाबंदी मूल आपराधिक कानून के तहत अपराधों पर लागू नहीं।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि पुलिस गर्भधारण-पूर्व और प्रसव-पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम के तहत अपराधों की जांच नहीं कर सकती। बता दें कि यह कानून भ्रूण के लिंग का पता लगाने के लिए प्रसव-पूर्व निदान तकनीक के इस्तेमाल पर रोक लगाने के उद्देश्य से लागू किया गया था।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून के तहत नामित अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए। पीसीपीएनडीटी अधिनियम से जुड़े मामले तकनीकी प्रकृति के होते हैं और इनकी जांच के लिए चिकित्सकीय ज्ञान और संवेदनशीलता की जरूरत हो सकती है।
पीठ ने कहा, "इस अधिनियम के तहत जांच करने के लिए पुलिस नहीं है।" इसके साथ ही पीठ ने यह जरूर कहा कि प्रविधानों के अनुसार पुलिस केवल सहायक की भूमिका निभा सकती है।
पीठ ने कहा, "यह पाबंदी केवल इस अधिनियम के तहत आने वाले अपराधों पर लागू होती है और इससे पुलिस की उन स्वतंत्र अपराधों की जांच करने और मुकदमा चलाने की शक्ति प्रभावित नहीं होती, जिनका उल्लेख मूल आपराधिक कानून में है।" सर्चोच्च न्यायालय का यह फैसला गर्भधारण-पूर्व और प्रसव-पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन का निषेध) अधिनियम, 1994 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने और अपराधों की जांच करने की पुलिस की शक्ति से जुड़े मामले में आया है।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
बिल गेट्स ने चेतावनी दी: गलत हाथों में एआई से 100 करोड़ जीवन का खतरा, सरकार से कड़े नियमों की माँग

कोलकाता हाईकोर्ट ने कहा: डिजिटल क्षेत्र में जातिगत गाली पर आपराधिक कार्रवाई संभव

दिल्ली HC: मुस्लिम वैवाहिक शादियों से POCSO का अपवाद नहीं

सुप्रीम कोर्ट में लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी की नई याचिका, यूपी सरकार पर भ्रामक जानकारी का आरोप

चुनाव आयोग का फ़ॉर्म‑६ बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट का समर्थन कथन विवादास्पद

उत्तरी प्रदेश सरकार ने कोर्ट को गुमराह किया, नोटिस देने वाले कार्यकारी मैजिस्ट्रेट को निलंबित नहीं किया: लॉ छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

सुप्रीम कोर्ट ने EC नियुक्ति विधि पर विभाजित रुख अपनाया: क्या बदलेगा चुनावी स्वतंत्रता?

संवैधानिक न्यायालय ही लगा सकते हैं संशोधित आजीवन कारावास, ट्रायल कोर्ट नहीं: सुप्रीम कोर्ट
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जमानत में न्यायाधीश नहीं थोप सकते निजी नैतिकता
- सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक ऊर्जा मंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार शिकायत को खारिज करने वाले हाई कोर्ट आदेश को बरकरार रखा, भाजपा MLA की अपील खारिज
- उच्च न्यायालय ने SGPC कर्मचारियों की बर्खास्तगी को उलट दिया, पाया 'भुकी' की पुनःप्राप्ति का सबूत अप्रमाणित
- बिल गेट्स की चेतावनी: अनियंत्रित AI से हो सकता है 100 करोड़ मौतों का जोखिम
- गोवा में धर्म‑परिवर्तन बिल को मिली आंतरिक विरोध से ठप्पी
- दिल्ली में ट्रैफ़िक चालान निपटाने का सुनहरा मौका: 25 अक्टूबर को लोक अदालत
- कर्नाटक के डीजीपी ने सेक्शन 35 बीएनएसएस के कड़ाई से पालन के लिए निर्देश जारी, पुलिस को व्यक्तिगत जवाबदेही की चेतावनी
- सुप्रीम कोर्ट ने फाइटर पायलट की विधवा को वायु सेना में पुनः भर्ती का आदेश दिया

