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गुरुग्राम के तत्कालीन तहसीलदार पर जुर्माना, RTI कानून के उल्लंघन में देरी

हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने गुरुग्राम के तत्कालीन तहसीलदार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है, जिन्होंने आरटीआई जानकारी देने में 4 वर्ष से अधिक समय लिया। आयोग ने कहा कि सूचना निर्धारित समय में नहीं दी गई थी, जो कानून की जड़ पर प्रहार करने जैसा था।

8 जुलाई 2026 को 08:58 am बजे
गुरुग्राम के तत्कालीन तहसीलदार पर जुर्माना, RTI कानून के उल्लंघन में देरी

सौजन्य से:- Jagran

गुरुग्राम के तत्कालीन तहसीलदार पर गिरी गाज, RTI कानून के उल्लंघन और लापरवाही पर आयोग ने ठोका जुर्माना

हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने गुरुग्राम के तत्कालीन तहसीलदार पर आरटीआई जानकारी देने में चार साल से अधिक की देरी के लिए ₹25,000 का जुर्माना लगाया। ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी देने में चार वर्ष से अधिक की देरी को गंभीर लापरवाही मानते हुए गुरुग्राम के वजीराबाद के तत्कालीन राज्य लोक सूचना अधिकारी (एसपीआईओ)-सह-तहसीलदार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

आयोग ने स्पष्ट किया कि आरटीआई कानून में निर्धारित 30 दिन की समय-सीमा का उल्लंघन बिना किसी उचित कारण के किया गया और प्रस्तुत किया गया स्पष्टीकरण पूरी तरह असंतोषजनक है।

राज्य सूचना आयुक्त डा अजय कुमार सूरा ने शिकायतकर्ता हरिंदर ढींगरा की शिकायत पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। मामला आठ नवंबर 2022 को दायर आरटीआई आवेदन से जुड़ा था। आयोग ने पाया कि मांगी गई सूचना निर्धारित समय में उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके बाद पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

जवाब में एसपीआईओ ने कहा कि मांगी गई जानकारी रिकार्ड में उसी स्वरूप में उपलब्ध नहीं थी तथा उसे तैयार करने के लिए कई वर्षों के विस्तृत अभिलेखों की पहचान, परीक्षण और संकलन करना पड़ा।

आयोग ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि यदि यही स्थिति थी तो भी आवेदक को निर्धारित अवधि के भीतर इसकी सूचना देना अनिवार्य था। आयोग ने अपने आदेश में कहा, उत्तर पूरी तरह असंतोषजनक, टालमटोल वाला और किसी भी विश्वसनीय कारण से रहित है।

एसपीआईओ यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि देरी किसी उचित कारण या उसके नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण हुई। आयोग ने यह भी कहा कि 'दोषपूर्ण देरी को बिना दंड के छोड़ना कानून की जड़ पर प्रहार करने जैसा होगा।

सुनवाई के दौरान नायब तहसीलदार ने सूचना देने में हुई देरी स्वीकार भी की, लेकिन आयोग ने कहा कि केवल गलती स्वीकार कर लेने से दंड से छूट नहीं मिल सकती। आयोग ने यह भी टिप्पणी की कि सूचना आयोग की सुनवाई से ठीक एक दिन पहले 18 जून 2026 को जवाब भेजा गया, जिससे यह प्रतीत होता है कि यह दंडात्मक कार्रवाई से बचने का प्रयास था।

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आयोग ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के रमेश शर्मा बनाम हरियाणा राज्य सूचना आयोग फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सूचना देने में साधारण देरी भी आरटीआई अधिनियम की धारा 20(1) के तहत दंडनीय है और ऐसी स्थिति में आयोग जुर्माना लगाने का अधिकार रखता है।

आदेश में उपायुक्त, गुरुग्राम को निर्देश दिया गया है कि संबंधित एसपीआईओ से 25 हजार रुपये की वसूली सुनिश्चित कर आयोग के खाते में तीन माह के भीतर जमा कराई जाए। साथ ही सभी आरटीआई आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने, लंबित मामलों की समीक्षा करने, प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित करने तथा सभी लोक सूचना अधिकारियों को आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों और उल्लंघन के परिणामों के प्रति संवेदनशील बनाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। आयोग ने चेतावनी दी कि भविष्य में समय-सीमा के उल्लंघन की पुनरावृत्ति होने पर और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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