राजीव गांधी फाउंडेशन को RTI कानून के तहत पब्लिक अथॉरिटी करार देने की मांग खारिज
राजीव गांधी फाउंडेशन को RTI कानून के तहत पब्लिक अथॉरिटी करार देने की मांग खारिज दिल्ली हाईकोर्ट ने राजीव गांधी फाउंडेशन को आरटीआई के तहत पब्लिक अथॉरिटी घोषित करने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. Published :…

सौजन्य से:- ETV Bharat
राजीव गांधी फाउंडेशन को RTI कानून के तहत पब्लिक अथॉरिटी करार देने की मांग खारिज
दिल्ली हाईकोर्ट ने राजीव गांधी फाउंडेशन को आरटीआई के तहत पब्लिक अथॉरिटी घोषित करने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है.
Published : August 19, 2026 at 10:06 AM IST
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने राजीव गांधी फाउंडेशन को सूचना के अधिकार (आरटीआई ) कानून के तहत लोक प्राधिकार (पब्लिक अथॉरिटी ) घोषित करने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने याचिका खारिज करने का आदेश दिया.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि याचिकाकर्ता और वकील शन्मुगा पात्रो पिछली कई तिथियों से सुनवाई में पेश नहीं हो रहे थे. याचिकाकर्ता ने 2011 में हाईकोर्ट का रुख किया था. उन्होंने केंद्रीय सूचना आयोग के साल 2010 के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें राजीव गांधी फाउंडेशन को आरटीआई कानून के तहत पब्लिक अथॉरिटी मानने से इनकार कर दिया गया था.
याचिका में कहा गया था कि राजीव गांधी फाउंडेशन की गतिविधियों का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है, इसलिए उसे आरटीआई कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए. याचिका में कहा गया था कि राजीव गांधी फाउंडेशन को सरकार की ओर से कई तरह की सुविधाएं और रियायतें मिली हैं. इनमें नई दिल्ली के राजेंद्र प्रसाद रोड पर करीब 9,319.42 वर्ग गज जमीन और उस पर बनी इमारत भी शामिल है.
राजीव गांधी फाउंडेशन को भी आरटीआई के दायरे में लाने की मांग
याचिका में कहा गया था कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के निधन के बाद 1991 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति ने लोगों से उन उद्देश्यों के लिए योगदान देने की अपील की थी, जिनसे राजीव गांधी जुड़े रहे थे.इसके बाद 1991-92 के केंद्रीय बजट में राजीव गांधी फाउंडेशन के गठन की घोषणा की गई थी. याचिकाकर्ता ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष और राष्ट्रीय रक्षा कोष का हवाला देते हुए कहा था कि इन दोनों को सरकारी अनुदान नहीं मिलने के बावजूद आरटीआई कानून के तहत पब्लिक अथॉरिटी माना गया है. याचिका में इसी आधार पर राजीव गांधी फाउंडेशन को भी आरटीआई के दायरे में लाने की मांग की गई थी.
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