सुप्रीम कोर्ट ने कहा हाई कोर्ट-सुप्रीम कोर्ट जजों की नियुक्ति प्रक्रिया कॉलेजियम में दखल नहीं दिया जा सकता
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम द्वारा संवैधानिक अदालतों (हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट) के जजों का चयन पूरी तरह से न्यायिक जांच से बाहर है।

सौजन्य से:- Panchjanya
भारत में कॉलेजियम व्यवस्था थोड़ी सी चुनौतीपूर्ण रही है। खास बात ये है कि इसकी चयन प्रक्रिया पर आरटीआई भी लागू नहीं होती है। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को साफ कहा कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम द्वारा संवैधानिक अदालतों (हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट) के जजों का चयन पूरी तरह से न्यायिक जांच से बाहर है।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ न्यासीनियर ज्यूडिशियल ऑफिसर अरविंद मल्होत्रा की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। मल्होत्रा ने आरोप लगाया था कि हाई कोर्ट कॉलेजियम ने उनकी उम्मीदवारी पर ध्यान नहीं दिया, जबकि सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश में उनकी कैंडिडेचर पर विचार करने को कहा गया था।
क्या था मामला?
अरविंद मल्होत्रा के वकील बलबीर सिंह ने बताया कि सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के एकतरफा फैसले को गलत बताया था। उस समय दो वरिष्ठसीनियर ज्यूडिशियल ऑफिसरों (जिनमें मल्होत्रा भी शामिल थे) की उम्मीदवारी को नजरअंदाज किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि चयन व्यक्तिगत रूप से चीफ जस्टिस नहीं, बल्कि पूरे कॉलेजियम को मिलकर करना चाहिए।
मल्होत्रा का कहना था कि कॉलेजियम ने उनकी उम्मीदवारी और उनके जवाबों पर विचार नहीं किया। लेकिन बेंच ने यह साफ कर दिया कि कॉलेजियम का फैसला उसकी व्यक्तिगत संतुष्टि पर आधारित होता है।
कोर्ट ने क्या कहा?
बेंच ने कहा, “हम पांडोरा बॉक्स नहीं खोलना चाहते। हम कॉलेजियम के फैसलों में दखल नहीं देंगे।” जजों ने बताया कि सैकड़ों उम्मीदवारों से बातचीत (इंटरैक्शन) की जाती है और उनमें से कुछ को ही चुना जाता है।
कोर्ट ने कहा:
संवैधानिक अदालतों के जजों के चयन की प्रक्रिया न तो न्यायिक जांच के अधीन है और न ही RTI के दायरे में आती है।
जूनियर अधिकारियों को सिफारिश करना किसी को याचिका दायर करने का आधार नहीं बनता।
सिर्फ सीनियरिटी के आधार पर किसी को जज बनने का हक नहीं मिलता। यह उपयुक्तता का सवाल है, जो कॉलेजियम तय करता है।
क्या हुआ फैसला?
2 जून को सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने हिमाचल हाई कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों पर विचार किया और तीन ज्यूडिशियल ऑफिसरों – चिराग भानु सिंह, भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल – को हाई कोर्ट जज के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दे दी। बेंच ने मल्होत्रा को सलाह दी कि वे अभी युवा हैं, इंतजार करें। साथ ही उन्हें हाई कोर्ट में लंबित जांच प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के लिए आवेदन करने की छूट दी। याचिका को निपटा दिया गया।कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सभी सामग्री (HC और सरकार से मिली) पर विचार करके मंजूर किया है। अब न्यायिक पक्ष से इसमें दखल नहीं दिया जा सकता।
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