सुप्रीम कोर्ट में धर्मांतरित मुस्लिमों के आरक्षण पर तमिलनाडु सरकार की अपील, मद्रास HC के फैसले को चुनौती
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें धर्म बदलकर इस्लाम अपनाने वाले व्यक्तियों को पिछड़ा वर्ग मुस्लिम श्रेणी में आरक्षण देने से इनकार किया गया था. सरकार का कहना है कि आरक्षण सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए दिया गया था.

सौजन्य से:- AajTak
धर्मांतरित मुस्लिमों के आरक्षण पर SC पहुंची तमिलनाडु सरकार, मद्रास HC के फैसले को दी चुनौती
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें धर्म बदलकर इस्लाम अपनाने वाले व्यक्तियों को पिछड़ा वर्ग मुस्लिम यानी BCM श्रेणी में आरक्षण देने से इनकार किया गया था.
X
सुप्रीम कोर्ट पहुंची तमिलनाडु सरकार.(File Photo: ITG)
- नई दिल्ली,
- 08 जुलाई 2026,
- (अपडेटेड 08 जुलाई 2026, 2:50 PM IST)
तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें धर्म बदलकर इस्लाम अपनाने वाले व्यक्तियों को पिछड़ा वर्ग मुस्लिम (BCM) श्रेणी में आरक्षण देने से साफ तौर पर इनकार किया गया था. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के साल 2024 के उस नीतिगत आदेश को असंवैधानिक करार दिया था, जिसके तहत अनुसूचित जाति (SC) या अन्य पिछड़े वर्ग (OBC) से इस्लाम धर्म में शामिल होने वालों को पिछड़ा वर्ग मुस्लिम माना जाता था. राज्य सरकार ने इस न्यायिक आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की है, ताकि धर्म परिवर्तन करने के बावजूद सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों को उनका अधिकार मिलता रहे.
मद्रास हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट टिप्पणी की थी कि केवल धर्म बदलने से कोई भी व्यक्ति अपनी जन्म-आधारित सामाजिक श्रेणी के अंदर नहीं आ सकता. उच्च न्यायालय ने अपने तर्क में ये भी कहा था कि इस्लाम धर्म पूरी तरह से समानता का उपदेश देता है, इसलिए इस आधार पर आरक्षण का दावा नहीं किया जा सकता.
सर्वोच्च न्यायालय में दायर अपनी याचिका में तमिलनाडु सरकार ने तर्क दिया है कि आरक्षण की सुविधा इसलिए दी गई थी, ताकि धर्म परिवर्तन के बाद भी सामाजिक रूप से पिछड़ चुके लोगों को मुख्यधारा में लाया जा सके.
सरकार का मानना है कि इस धार्मिक बदलाव से सामाजिक व्यवस्था में जाति अक्षुण्ण रहे और राज्य में जाति, धर्म का सामाजिक संतुलन न बिगड़ने पाए.
---- समाप्त ----
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
बिहार विश्वविद्यालय कानून के विरोध में शिक्षक संघों का प्रदर्शन

लोकसभा में ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश, 16 न्यायाधिकरणों के लिए निगरानी

मानदेय बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी गई लड़ाई

पिछली तारीख से टैक्स की देनदारी सही, लेकिन जुर्माना नहीं: सुप्रीम कोर्ट

बिहार में गुजरात मॉडल की शराबबंदी लागू होनी चाहिए: जीतन राम मांझी

दुर्गा कॉलोनी का दोबारा सर्वे: फरीदाबाद में 234 एकड़ जमीन की होगी जांच, प्लॉटधारकों को राहत की उम्मीद

पिता को अदालत का झटका: बेटी की शिक्षा के लिए जमा पैसा भरण-पोषण में नहीं गिना जा सकता

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिलेगी दुर्गा बिल्डर कॉलोनी के प्लॉटधारकों को राहत
ताज़ा ख़बरें
- ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक 2026: जयराम रमेश ने केंद्र की योजना का किया समर्थन
- मेटा को 567 मिलियन डॉलर का भुगतान करने का आदेश, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर ध्यान देने के लिए
- दोषियों की अपीलों में देरी को माफ करने का मौका, न्यायपालिका ने दी दिशानिर्देश
- JPSC परीक्षा घोटाला: सुप्रीम कोर्ट में याचिका, दोबारा परीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
- शासन को आरोप तय करने में लगे 10 साल, अदालत में पहुंचते ही निरस्त
- उत्तर प्रदेश सरकार ने मृत कर्मचारियों के पुत्रों को नौकरी देने का निर्देश दिया
- JPSC परीक्षा का सुप्रीम कोर्ट में विवाद: परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग
- बच्चों की शिक्षा पर भार : शिक्षक भर्ती के लंबित मुकदमों के लिए स्पेशल कोर्ट, संघ ने दी मांग

