सुप्रीम कोर्ट ने आयकर अधिनियम की धारा 13ए पर सुनवाई: नकद चंदे की वैधता पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट आज आयकर अधिनियम की धारा 13ए पर याचिका पर सुनवाई करेगा, जो राजनीतिक दलों को 2,000 रुपये से कम के गुमनाम नकद चंदे स्वीकार करने की अनुमति देती है। याचिका में पारदर्शिता के अभाव से चुनाव प्रक्रिया पर असर पड़ने का दावा किया गया है, और पिटिशनर ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि दलों को नकद स्वीकार करने पर रोक लगाई जाए।

सौजन्य से:- Jagran
राजनीतिक दलों के नकद चंदे पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई, आयकर अधिनियम की किस धारा पर उठे सवाल?
सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक दलों को 2,000 रुपये से कम के गुमनाम नकद चंदे की अनुमति देने वाले आयकर अधिनियम की धारा 13ए की वैधता पर आज सुनवाई करेगा।
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट आज नकद चंदे से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करेगा।
- याचिका आयकर अधिनियम की धारा 13ए की वैधता को चुनौती देती है।
- यह धारा 2,000 रुपये से कम के गुमनाम चंदे की अनुमति देती है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक दलों को मिले नकद चंदे से जुड़ी याचिका पर आज सुनवाई करेगा।
इस याचिका में आयकर अधिनियम के उस प्रविधान की वैधता को चुनौती दी गई है, जो राजनीतिक दलों को 2,000 रुपये से कम के ‘गुमनाम यानी पहचान गुप्त रखते हुए’ दिए गए नकद चंदे को स्वीकार करने की अनुमति देता है।
याचिका में कहा गया है कि पारदर्शिता की कमी चुनाव प्रक्रिया की शुचिता को कमजोर करती है, जिससे मतदाता चंदा देने वालों और उनके उद्देश्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी से वंचित रह जाते हैं। इससे वे मतदान करते समय तर्कसंगत, समझदारी भरा और पूरी जानकारी के साथ सही फैसला नहीं कर पाते।
कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से मांगा था जवाब
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आने वाली याचिकाओं की सूची के अनुसार, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के इस मामले की सुनवाई करने की संभावना है। न्यायालय ने पहले केंद्र, चुनाव आयोग और अन्य को नोटिस जारी कर मामले में जवाब-तलब किया था।
खेम सिंह भाटी द्वारा दाखिल याचिका में अनुरोध किया गया है कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि किसी राजनीतिक दल के पंजीकरण और चुनाव चिह्न के आवंटन के लिए यह शर्त तय की जाए कि कोई भी राजनीतिक दल नकद में कोई रकम नहीं ले सकता।
याचिका में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 13ए की उपधारा (डी) को असंवैधानिक बताते हुए उसे रद करने का अनुरोध किया गया है। इसमें न्यायालय के 2024 के उस फैसले का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें चुनावी बॉन्ड योजना को रद कर दिया गया था।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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