शिमला: अदालत ने निचली अदालत को दिया गवाह पेश करने का मौका
राजधानी शिमला की अदालत ने एक बड़ी घोषणा की है। अदालत ने निचली अदालत के आदेश को खारिज करते हुए अभियोजन को गवाह पेश करने का अवसर देने का निर्देश दिया है। यह आदेश विजय कुमार के खिलाफ दर्ज एक सड़क हादसे के मामले में दिया गया है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Shimla News: निचली अदालत को गवाह पेश करने का अवसर देने के निर्देश
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शिमला। राजधानी के बालूगंज पुलिस स्टेशन के तहत साल 2017 में दर्ज एक सड़क हादसे के मामले में शिमला की अदालत ने अभियोजन को बड़ी राहत दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-दो शिमला की अदालत ने निचली अदालत की ओर से अभियोजन साक्ष्य को बंद करने के आदेश को कानूनी रूप से अस्थिर मानते हुए खारिज कर दिया है।
अदालत ने अब निचली अदालत को निर्देश दिए हैं कि अभियोजन को अपने गवाह पेश करने का उचित अवसर दिया जाए। यह मामला 26 जुलाई 2017 का है जब टुटू चौक पर एक वाहन ने राजन नामक व्यक्ति को टक्कर मार दी थी, इससे उनकी मृत्यु हो गई थी। आरोपी विजय कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान 7 सितंबर 2024 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने अभियोजन साक्ष्य को बंद करने का आदेश दिया था जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-दो शिमला ने पाया कि मामले की फाइल लंबे समय तक विभिन्न अदालतों में स्थानांतरित होती रही और कोविड-19 महामारी के कारण भी कार्रवाई में देरी हुई। अभियोजन का साक्ष्य बंद होने से मामले का भविष्य प्रभावित हो रहा था जो न्याय की विफलता के समान है। इस आधार पर निचली अदालत के 7 सितंबर, 2024 के आदेश को रद्द कर दिया है। अब दोनों पक्षों को निचली अदालत में 1 अगस्त 2026 को पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।
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अदालत ने अब निचली अदालत को निर्देश दिए हैं कि अभियोजन को अपने गवाह पेश करने का उचित अवसर दिया जाए। यह मामला 26 जुलाई 2017 का है जब टुटू चौक पर एक वाहन ने राजन नामक व्यक्ति को टक्कर मार दी थी, इससे उनकी मृत्यु हो गई थी। आरोपी विजय कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान 7 सितंबर 2024 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने अभियोजन साक्ष्य को बंद करने का आदेश दिया था जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-दो शिमला ने पाया कि मामले की फाइल लंबे समय तक विभिन्न अदालतों में स्थानांतरित होती रही और कोविड-19 महामारी के कारण भी कार्रवाई में देरी हुई। अभियोजन का साक्ष्य बंद होने से मामले का भविष्य प्रभावित हो रहा था जो न्याय की विफलता के समान है। इस आधार पर निचली अदालत के 7 सितंबर, 2024 के आदेश को रद्द कर दिया है। अब दोनों पक्षों को निचली अदालत में 1 अगस्त 2026 को पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।
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