सुप्रीम कोर्ट की वीडियो जानबूझकर सोशल मीडिया पर नहीं होगी वायरल, जानें क्या है कारण?
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी किया है कि उसकी या हाई कोर्ट की न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को अनुमति के बिना सोशल मीडिया पर अपलोड नहीं किया जाएगा।

सौजन्य से:- Amar Ujala
Supreme Court: अब कोर्ट की वीडियो सोशल मीडिया पर नहीं होगी वायरल; बिना अनुमति अपलोड पर रोक; अदालत क्या बोली?
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी कर कहा है कि उसकी या हाई कोर्ट की न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को अनुमति के बिना सोशल मीडिया पर अपलोड नहीं किया जाएगा। हालांकि, मान्यता प्राप्त मीडिया संस्थानों की कोर्ट रिपोर्टिंग इस आदेश से प्रभावित नहीं होगी। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग को सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल या संबंधित हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति के बिना निकाला, प्रसारित किया, उससे आर्थिक लाभ कमाया या सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने देशभर में अदालतों की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के लिए एक समान ढांचा लागू करने की मांग वाली रिट याचिका पर नोटिस जारी करते हुए यह अंतरिम निर्देश दिया।
बिना अनुमति रिकॉर्डिंग साझा करने पर क्या-क्या प्रतिबंध रहेंगे?
अंतरिम व्यवस्था के तहत शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि भारत के सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल या संबंधित हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति के बिना न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निकालना, प्रसारित करना, उससे कमाई करना, पोस्ट करना, री-पोस्ट करना, अपलोड करना, ट्रांसमिट करना, संशोधित करना, स्टोर करना या होस्ट करना प्रतिबंधित रहेगा।
क्या मीडिया की कोर्ट रिपोर्टिंग पर भी असर पड़ेगा?
सीजेआई सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि इस अंतरिम आदेश का प्रभाव मान्यता प्राप्त समाचार संस्थानों द्वारा अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर नहीं पड़ेगा। पीठ ने कहा कि इस आदेश का मान्यता प्राप्त समाचार आउटलेट्स द्वारा कोर्ट की कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
किन-किन पक्षों को बनाया गया मामले का पक्षकार?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाई कोर्ट के साथ-साथ प्रमुख सोशल मीडिया मध्यस्थों और प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्मों को भी मामले में पक्षकार बनाया। अदालत ने केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, सभी हाई कोर्ट और सोशल मीडिया मध्यस्थों जिनमें लिंक्डइन, मेटा प्लेटफॉर्म्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, गूगल, एक्स कॉर्प और यूट्यूब शामिल हैं को नोटिस जारी किया।
केंद्र सरकार को क्या निर्देश दिए गए हैं?
केंद्र सरकार को शीर्ष अदालत के समक्ष उन नोडल मंत्रालयों की पहचान करते हुए प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है, जो याचिका में मांगी गई राहतों को लागू करेंगे। आदेश में कहा गया, 'भारत संघ को निर्देश दिया जाता है कि वह इस रिट याचिका में की गई मांगों को लागू करने के लिए नोडल मंत्रालयों के संबंध में एक प्रस्ताव प्रस्तुत करे।'
हाई कोर्ट से किस बात की स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है?
सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत द्वारा जारी कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग से जुड़े मॉडल नियमों को अपनाने के संबंध में सभी हाई कोर्ट से स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है। सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया कि सभी हाई कोर्ट यह बताएं कि उन्होंने इन मॉडल नियमों को अपनाने की दिशा में क्या प्रगति की है। साथ ही अपनी रिपोर्ट में लगातार और निर्बाध लाइव स्ट्रीमिंग के प्रभाव तथा उसकी व्यावहारिकता का भी उल्लेख करें।
ये भी पढ़ें: NEET Paper Leak: CBI ने दाखिल की 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट, फास्ट ट्रैक अदालत कल करेगी सुनवाई
आदेश को सार्वजनिक करने के लिए क्या कहा गया है?
पीठ ने निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल और सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल इस आदेश को आम जनता की जानकारी के लिए अपनी-अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करें। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को निर्धारित की है।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस मोहपात्रा का छत्तीसगढ़ में तबादला, सुप्रीम कोर्ट ने 4 जजों का किया ट्रांसफर

पटना हाईकोर्ट को मिलेंगे नए चीफ जस्टिस: जानिए कौन हैं वी. कामेश्वर राव

वी. कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट का नवीन चीफ जस्टिस नियुक्ति

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बड़ी सिफारिश, न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव बन सकते हैं पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश

लोकसभा में ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश, राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन का प्रस्ताव

नौकरीपेशा लोगों के लिए कानून की पढ़ाई पर लगी रोक, अब केवल नियमित पाठ्यक्रम ही मान्य

ड्रग्स मामलों की जांच में तेजी लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

बृजभूषण शरण सिंह के वकील ने बरी होने के बाद दिया बयान
ताज़ा ख़बरें
- एनजीटी को निकोबार परियोजना रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए: ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक से पहले कांग्रेस - द ट्रिब्यून
- भारत: बॉम्बे हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश घुगे को कलकत्ता हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने का प्रस्ताव
- जस्टिस रवींद्र वी घुगे अब कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस होंगे
- चार हाईकोर्ट में नए चीफ जस्टिस, नोमिनेटेड किन्हें?
- सुप्रीम कोर्ट में बड़ी दिशा चुनौतीपूर्ण बदलाव, चार जजों का हाईकोर्ट का संभावित सामना: जानिए क्या है कॉलेजियम की सिफारिश
- मद्रास उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ी, 15 नए न्यायाधीशों ने ली शपथ
- पटना उच्च न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश
- सुप्रीम कोर्ट ने अडानी-राजस्थान पावर विवाद में फिर किया फेरबदल, पूर्व जज की जगह दूसरे जज को बनाया आर्बिट्रेटर

