सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के शास्त्री नगर के सेंट्रल मार्केट मामले में अवैध निर्माण को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने शास्त्री नगर योजना सात में एक अप्रैल को सील की गईं 44 संपत्तियों के अवैध भाग को ध्वस्त कर मानचित्र के अनुसार लाने के आदेश दिए हैं।

सौजन्य से:- Jagran
मेरठ के सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, सेटबैक की जगह हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ की शास्त्री नगर योजना-7 में सील की गई 44 संपत्तियों के अवैध हिस्सों को ध्वस्त कर मूल स्वरूप में लाने का आदेश दिया है। निम्न और द ...और पढ़ें
HighLights
- निम्न और दुर्बल आय वर्ग के मकानों के भी सेटबैक तोड़ने का कोर्ट का आदेश।
- शहर के अन्य भागों में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों को चिन्हित करने का आदेश।
- नई भवन निर्माण उपविधि लागू करने से इन्कार, सितंबर में होगी अगली सुनवाई।
जागरण संवाददाता, मेरठ। सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के शास्त्री नगर के सेंट्रल मार्केट मामले में अवैध निर्माण को लेकर कड़ा रूख अपनाया है। कोर्ट ने शास्त्री नगर योजना सात में एक अप्रैल को सील की गईं 44 संपत्तियों के अवैध भाग (सेट बैक की जगह हुए निर्माण) को ध्वस्त कर मानचित्र के अनुसार लाने के आदेश दिए।
मंगलवार को न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की कोर्ट ने शास्त्री नगर सेंट्रल मार्किट प्रकरण में लोकेश खुराना की अवमानना याचिका पर सुनवाई की। वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने आवंटियों को राहत देने के लिए नई भवन निर्माण उपविधि को लागू करने का आग्रह किया, लेकिन इसे कोर्ट ने मानने से इन्कार कर दिया। निम्न और दुर्बल आय वर्ग के 459 मकानों के भी सेटबैक तोड़ने के आदेश दिए।
प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन को आदेश दिया कि वह शहर के अन्य भागों में भी ऐसी संपत्तियों को चिन्हित करें जो आवासीय भवनों में संचालित हो रही हैं। सितंबर माह में होने वाली अगली सुनवाई में उनकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदु
- सील की गई 44 संपत्तियों के अवैध भाग को ध्वस्त करने के आदेश। मूल स्वरूप में लाने के आदेश दिए।
- निम्न और दुर्बल आय वर्ग के मकानों के भी सेटबैक तोड़ने के आदेश।
- नई भू उपयोग उपविधि को लागू करने से मना किया।
- प्रमुख सचिव आवास को निर्देश दिए कि शहर के अन्य भागों में भी ऐसी संपत्तियों को चिन्हित करें जो आवासीय भवनों मे संचालित हो रही हैं। अगली सुनवाई में उनकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए।
- यह भी पढ़ें- अब खुद भरेंगी कंक्रीट की दरारें, CCSU ने विकसित की खास तकनीक; इससे निर्माण की लागत भी घटेगी
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