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ममता बनर्जी ने TMC का सिंबल फ्रीज चुनौती के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, 21 सितंबर को सुनवाई सम्भावित

चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और फूल-घास चिह्न को फ्रीज करने के बाद ममता बनर्जी ने इसे असंवैधानिक कहा और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। सोमवार को सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने इस मुद्दे पर चर्चा होने की उम्मीद है, जबकि नंदीग्राम उपचुनाव में उनके गुट की उम्मीदवार ने नामांकन वापस ले लिया।

18 सितंबर 2026 को 07:04 pm बजे
ममता बनर्जी ने TMC का सिंबल फ्रीज चुनौती के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, 21 सितंबर को सुनवाई सम्भावित

सौजन्य से:- Navbharat Times

बंगाल में नंदीग्राम से ममता बनर्जी के कैंडिडेट का सरेंडर, कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान अरेस्ट

21 सितंबर को सुनवाई संभव

केंद्रीय चुनाव आयोग ने गुरुवार को टीएमसी के के असली नाम और चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। ममता बनर्जी ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले पर जल्द सुनवाई के लिए सोमवार (21 सितंबर) को सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने याचिका का जिक्र किए जाने की संभावना है।न हम सिर झुकाएंगे, न ही हार मानेंगे, ममता बनर्जी ने राहुल-केजरीवाल का जिक्र कर INDIA गठबंधन को दिया समर्थन

आयोग ने क्यों फ्रीज किया सिंबल और पार्टी का नाम

चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी विवाद और पार्टी पर वर्चस्व को लेकर ममता बनर्जी गुट और ऋतब्रत बनर्जी गुट के बीच उत्पन्न मतभेदों के आधार पर यह फैसला लिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुट मौजूद हैं और दोनों ही असली टीएमसी होने का दावा कर रहे हैं। आयोग ने यह निर्णय पश्चिम बंगाल में होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर के उपचुनाव को ध्यान में रखते हुए लिया है। चुनाव आयोग ने इलेक्शन सिंबल्स ऑर्डर, 1968 के पैरा 15 के तहत यह अंतरिम कदम उठाया। आयोग के अनुसार चुनाव से पहले दोनों पक्षों के दावों पर पूरी तरह से फैसला करना संभव नहीं था, इसलिए निष्पक्षता बनाए रखने के लिए टीएमसी का नाम और 'फूल-घास' चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया गया।नंदीग्राम उपचुनाव में सियासी खेल, ममता बनर्जी गुट की कैंडिडेट संचिता प्रधान ने नामांकन वापस लिया

ममता बनर्जी ने बोला हमला- 7 बड़ी बातें

पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस का नाम और पारंपरिक 'जोड़ा फूल' चुनाव चिह्न फ्रीज किए जाने, और नंदीग्राम उपचुनाव से उनकी उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के हटने के बाद, ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और अपने बयानों के जरिए केंद्र सरकार, भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। चुनाव आयोग द्वारा उनके गुट को नया नाम 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और चुनाव चिह्न 'फुटबॉल प्लेयर' दिए जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वैकल्पिक नाम-चिह्न देना सिर्फ उपचुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए था, इसे आयोग के फैसले की स्वीकार्यता न माना जाए। वे अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी।- लोकतंत्र के इतिहास का 'काला दिन': ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि हम संवैधानिक कुर्सी का अनादर नहीं करते, लेकिन आज का दिन हमारे लोकतांत्रिक इतिहास में एक 'काला दिन' है।

- पहले से तय थी पूरी साजिश: ममता बने कहा कि उनकी पार्टी से नाम और सिंबल छीनने की यह कोशिश अचानक नहीं हुई, बल्कि इसे बहुत पहले से और एडवांस में प्लान किया गया था।

- 'न नाम रहने दूंगा, न निशान': केंद्र की सत्ता पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विरोधियों ने पहले ही कह दिया था कि 'नाम भी रखने दूंगा, निशान भी नहीं रखने दूंगा'। उन्होंने चेतावनी दी कि जो आज सत्ता में हैं, वो कल नहीं भी हो सकते हैं, उन्हें अपनी सीमाएं समझनी चाहिए।

- पार्टियों को तोड़ने का खेल: ममता ने केंद्र सरकार पर विपक्षी दलों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी को तोड़ा गया और अब वही फॉर्मूला टीएमसी पर आजमाया जा रहा है।

- नंदीग्राम में 'खेला': नंदीग्राम उपचुनाव में उनकी उम्मीदवार संचिता प्रधान डे द्वारा अचानक नाम वापस लेने और सीएम शुभेंन्दु अधिकारी से मिलने को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई और इसे एक बड़ी राजनीतिक साजिश का हिस्सा बताया।

- कांग्रेस उम्मीदवार को खुला समर्थन: अपनी उम्मीदवार के हटने के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने बड़ा सियासी दांव चलते हुए नंदीग्राम सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को बिना शर्त खुला समर्थन देने का एलान कर दिया, ताकि बीजेपी के खिलाफ 'इंडिया' गठबंधन मजबूत रहे।

- सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया: चुनाव आयोग के इस अंतरिम फैसले को उन्होंने पूरी तरह गैर-कानूनी बताया और इसके खिलाफ तुरंत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

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