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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: जियोस्टार की ट्रांसफर याचिका निपटाई, दिल्ली हाई कोर्ट में पक्ष रखने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने जियोस्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ट्राई के टीवी चैनल मूल्य निर्धारण नियमों को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा कर दिया और कंपनी को दिल्ली हाई कोर्ट में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया।

4 अगस्त 2026 को 08:15 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: जियोस्टार की ट्रांसफर याचिका निपटाई, दिल्ली हाई कोर्ट में पक्ष रखने का निर्देश

सौजन्य से:- Jagran

TRAI टैरिफ विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने JioStar की ट्रांसफर याचिका निपटाई, दिल्ली HC में पक्ष रखने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने जियोस्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ट्राई के टीवी चैनल मूल्य निर्धारण नियमों को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा किया। शीर्ष अदालत ...और पढ़ें

HighLights

- सुप्रीम कोर्ट ने जियोस्टार की ट्राई नियमों पर याचिका निपटाई।

- कंपनी को दिल्ली हाई कोर्ट में संशोधन न करने को कहा।

- ट्राई के टीवी चैनल मूल्य निर्धारण नियमों को चुनौती दी गई।

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने टेलीविजन चैनल मूल्य निर्धारण से जुड़े भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के नियमों को चुनौती देने वाली जियोस्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की स्थानांतरण याचिका का मंगलवार को निपटारा कर दिया।

शीर्ष अदालत ने मीडिया कंपनी से कहा कि वह दिल्ली हाई कोर्ट जाकर यह साफ करे कि वह टैरिफ को लेकर अपनी लंबित याचिकाओं में कोई संशोधन नहीं करना चाहती है।

हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल करने को कहा

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से कहा कि वह हाई कोर्ट में अपनी अर्जी दाखिल करें।

मीडिया कंपनी ने कानूनी फर्म 'करंजवाला एंड कंपनी' के जरिये सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। शीर्ष अदालत ट्राई की नियामक प्रणाली से जुड़ी दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

इन याचिकाओं में टैरिफ आदेश, अधिकतम खुदरा मूल्य की सीमा और केबल तथा डीटीएच वितरण पर छूट जैसे मामले शामिल थे।

जियोस्टार का प्रतिनिधित्व कर रहे रोहतगी ने तर्क दिया कि ट्राई के नियम और टैरिफ आदेश आंतरिक रूप से जुड़े और एक-दूसरे से संबंधित हैं। इन्हें केवल हाई कोर्ट में ही चुनौती दी जा सकती है।

हालांकि, टैरिफ आदेश प्रशासनिक प्रकृति के होते हैं और दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीसैट) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। टैरिफ आदेश और रेगुलेशन एक साथ जारी किए गए थे। एक विधायी शक्ति के तहत और दूसरा प्रशासनिक शक्ति के तहत जारी किया गया था।

"सब्सक्राइबर" की परिभाषा का दिया हवाला

जियोस्टार के वकील मुकुल रोहतगी ने "सब्सक्राइबर" की परिभाषा का हवाला देते हुए कहा कि कीमत तय करने के मामले में सैकड़ों टेलीविजन सेट वाले लग्जरी होटल और एक बेडरूम वाले घर को एक ही श्रेणी में रखा गया है।

हमारा कहना है कि अगर कोई होटल एक कमरे के लिए 50 हजार रुपये चार्ज कर रहा है, तो सिग्नल के कमर्शियल इस्तेमाल और घर में इस्तेमाल के बीच फर्क होना चाहिए। दोनों के लिए एक ही टैरिफ नहीं हो सकता। यह सेब और संतरे की तुलना करने जैसा है।

जियोस्टार ने 2014 और 2015 में दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर नियमों और टैरिफ आदेश, दोनों को चुनौती दी थी। रोहतगी ने कहा कि ब्राडकास्टर के यह कहने के बावजूद कि याचिकाओं में किसी बदलाव की ज़रूरत नहीं है, हाई कोर्ट ने बिना वजह बदलाव का निर्देश दिया और साथ ही जुर्माना भी लगाया।

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रोहतगी ने बार-बार पूछा, जुर्माना क्यों? और कहा कि आदेश से पता चलता है कि कोर्ट ने पहले ही यह राय बना ली थी कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो याचिकाओं को खारिज कर दिया जाएगा।

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