लखनऊ की अदालत ने मुख्य आरोपी को दोषी किया, साक्ष्य की कमी से संदीप को बरी
अदालत ने विवेक तिवारी के हत्या मामले में प्रमुख आरोपी प्रशांत चौधरी को धारा 304 के तहत दंडनीय ठहराया, जबकि दूसरे आरोपी संदीप कुमार को साक्ष्य न मिलने पर बरी कर दिया गया। तिवारी की पत्नी इस निर्णय से असंतुष्ट होकर हाई कोर्ट में अपील करने का इरादा जताती हैं।

सौजन्य से:- Jagran
विवेक तिवारी हत्याकांड: अदालत ने मुख्य आरोपी को ही माना दोषी, साक्ष्य के अभाव में संदीप बरी
लखनऊ की अदालत ने विवेक तिवारी हत्याकांड में मुख्य आरोपी प्रशांत चौधरी को दोषी ठहराया है, जबकि दूसरे आरोपी संदीप को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया है।
HighLights
- अदालत ने प्रशांत चौधरी को विवेक तिवारी हत्याकांड में दोषी माना।
- साक्ष्यों के अभाव में संदीप कुमार को मामले से बरी किया गया।
- विवेक की पत्नी कल्पना फैसले से असंतुष्ट, हाईकोर्ट जाएंगी।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। गोमतीनगर के बहुचर्चित एप्पल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में आठ साल तक सुनवाई, गवाही और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आज मुख्य आरोपित प्रशांत चौधरी को दोषी माना।
हालांकि साक्ष्यों के अभाव में प्रशांत को धारा 302 के बजाए केवल धारा 304 के तहत दोषी पाया गया। सोमवार को इस मामले में सज़ा सुनाई जाएगी।
वहीं दूसरे आरोपित संदीप को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत में मौजूद विवेक की पत्नी कल्पना फैसले से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि न्याय के लिए वह हाइ कोर्ट जाएंगी।
29 सितंबर 2018 की रात विवेक तिवारी की पुलिसकर्मियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। घटना की रात विवेक तिवारी आफिस से अपनी सहकर्मी सना खान के साथ कार से लौट रहे थे।
गोमतीनगर विस्तार में मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने उनकी कार को रोकने का प्रयास किया। कार नहीं रोकने पर प्रशांत चौधरी ने विवेक को गोली मार दी थी।
यह भी पढ़ें- आगरा: काली नागिन के डसने से बच्ची की मौत, चचेरा भाई अस्पताल में भर्ती
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
बिल गेट्स ने चेतावनी दी: गलत हाथों में एआई से 100 करोड़ जीवन का खतरा, सरकार से कड़े नियमों की माँग

कोलकाता हाईकोर्ट ने कहा: डिजिटल क्षेत्र में जातिगत गाली पर आपराधिक कार्रवाई संभव

दिल्ली HC: मुस्लिम वैवाहिक शादियों से POCSO का अपवाद नहीं

सुप्रीम कोर्ट में लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी की नई याचिका, यूपी सरकार पर भ्रामक जानकारी का आरोप

चुनाव आयोग का फ़ॉर्म‑६ बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट का समर्थन कथन विवादास्पद

उत्तरी प्रदेश सरकार ने कोर्ट को गुमराह किया, नोटिस देने वाले कार्यकारी मैजिस्ट्रेट को निलंबित नहीं किया: लॉ छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

सुप्रीम कोर्ट ने EC नियुक्ति विधि पर विभाजित रुख अपनाया: क्या बदलेगा चुनावी स्वतंत्रता?

संवैधानिक न्यायालय ही लगा सकते हैं संशोधित आजीवन कारावास, ट्रायल कोर्ट नहीं: सुप्रीम कोर्ट
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जमानत में न्यायाधीश नहीं थोप सकते निजी नैतिकता
- सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक ऊर्जा मंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार शिकायत को खारिज करने वाले हाई कोर्ट आदेश को बरकरार रखा, भाजपा MLA की अपील खारिज
- उच्च न्यायालय ने SGPC कर्मचारियों की बर्खास्तगी को उलट दिया, पाया 'भुकी' की पुनःप्राप्ति का सबूत अप्रमाणित
- बिल गेट्स की चेतावनी: अनियंत्रित AI से हो सकता है 100 करोड़ मौतों का जोखिम
- गोवा में धर्म‑परिवर्तन बिल को मिली आंतरिक विरोध से ठप्पी
- दिल्ली में ट्रैफ़िक चालान निपटाने का सुनहरा मौका: 25 अक्टूबर को लोक अदालत
- कर्नाटक के डीजीपी ने सेक्शन 35 बीएनएसएस के कड़ाई से पालन के लिए निर्देश जारी, पुलिस को व्यक्तिगत जवाबदेही की चेतावनी
- सुप्रीम कोर्ट ने फाइटर पायलट की विधवा को वायु सेना में पुनः भर्ती का आदेश दिया

