बंगाल विधानसभा में ओबीसी आरक्षण बिल पास, लेकिन हाई कोर्ट में पहले ही चुनौती
बंगाल में ओबीसी आरक्षण को लेकर कानूनी और राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। विधानसभा में ओबीसी आरक्षण से जुड़े दो अहम संशोधनों के पारित होने के बावजूद, कलकत्ता हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।

सौजन्य से:- Jagran
बंगाल विधानसभा में ओबीसी आरक्षण बिल पास, लेकिन पहले ही हाई कोर्ट पहुंचा मामला
बंगाल विधानसभा में ओबीसी आरक्षण से जुड़े दो संशोधन बिल भारी बहुमत से पारित हो गए हैं, लेकिन यह मामला पहले ही कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंच गया है। एक जनहित ...और पढ़ें
HighLights
- विधानसभा में ओबीसी आरक्षण संशोधन बिल पारित।
- नए ओबीसी प्रमाणपत्र सत्यापन को हाई कोर्ट में चुनौती।
- याचिकाकर्ता ने सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण को लेकर कानूनी और राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। राज्य विधानसभा में ओबीसी आरक्षण से जुड़े दो अहम संशोधनों के पारित होने से ठीक पहले यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट के दरवाजे पर पहुंच गया। नए सिरे से ओबीसी प्रमाणपत्रों के सत्यापन (वेरिफिकेशन) को लेकर हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि राज्य सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग से बिना किसी परामर्श के यह नई अधिसूचना जारी कर दी है, जो पूरी तरह से गैर-कानूनी और 'सत्तारूढ़ शक्ति का दुरुपयोग' (कलारेबल एक्सरसाइज आफ पावर) है।
प्रभारी मुख्य न्यायाधीश तपोब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की त्वरित सुनवाई की अपील की गई। दरअसल, अदालत ने पहले माकपा (सीपीएम) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया था कि साल 2011 के बाद राज्य में तैयार की गई ओबीसी सूची को पहले ही रद किया जा चुका है, इसलिए अब पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करनी होगी।
हालांकि, इसके तुरंत बाद एक अन्य याचिकाकर्ता ने सरकार की ताजा अधिसूचना को चुनौती देते हुए जल्द सुनवाई की मांग की। वकील ने दलील दी कि विधानसभा में बिल पास होने और सुप्रीम कोर्ट से 'विशेष अनुमति याचिका' (एसएलपी) वापस लेने की संभावनाओं के बीच इस मामले पर तुरंत हस्तक्षेप जरूरी है।
इस कानूनी खींचतान के बीच, विधानसभा में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री गौरीशंकर घोष द्वारा पेश किए गए दोनों संशोधन बिल—'वेस्ट बंगाल बैकवर्ड क्लासेज रिजर्वेशन अमेंडमेंट बिल 2026' और 'द वेस्ट बंगाल कमीशन फार बैकवर्ड क्लासेज अमेंडमेंट बिल 2026' भारी बहुमत से पारित हो गए। आइएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी की मांग पर कराए गए मतविभाजन में बिल के पक्ष में 186 और विपक्ष में महज 17 वोट पड़े, जबकि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले असंतुष्ट तृणमूल धड़े ने सदन से वाकआउट किया।
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