होममुकदमे70 साल पहले शुरू हुआ ज़मीन विवाद: SC ने दी शराफत अली को बड़ी राहत
मुकदमे

70 साल पहले शुरू हुआ ज़मीन विवाद: SC ने दी शराफत अली को बड़ी राहत

उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के नारसीपुर कलां गांव की 15.5 बीघा ज़मीन के मालिकाना हक के लिए चल रहे 70 साल पुराने विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने शराफत अली के पक्ष में फैसला सुनाया। इस मामले में निचली अदालत और हाई कोर्ट ने सेल डीड को अमान्य माना था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे वैध करार दिया और शराफत अली के परिवार को जमीन का मालिक माना है।

27 जून 2026 को 09:24 am बजे
70 साल पहले शुरू हुआ ज़मीन विवाद: SC ने दी शराफत अली को बड़ी राहत

सौजन्य से:- Prabhasakshi

Yes Milord | 70 साल पुराना ज़मीन विवाद: नेहरू से मोदी तक बदलते रहे देश के PM, जिस डीड पर आया SC का फैसला... तब पैदा भी नहीं हुए थे दोनों जज!

एक दिलचस्प पहलू ये भी है कि यह केस भारतीय न्याय व्यवस्था की कछुआ चाल को भी दर्शाता है और साथ ही इस भरोसे को भी मज़बूत करता है कि देर से ही सही, लेकिन कानून के घर में अंधेर नहीं है। जिस दस्तावेज़ को कोर्ट ने सही माना, वह देश के मौजूदा जजों की उम्र से भी ज़्यादा पुराना है!

70 साल पुराना ज़मीन विवाद: जब आज़ाद भारत के हर प्रधानमंत्री का दौर गुज़र गया, पर इंसाफ़ का इंतज़ार ख़त्म नहीं हुआ। यह कहानी देश के एक ऐसे अनोखे और सबसे लंबे चलने वाले कानूनी मुकदमों में से एक की है, जिसने आज़ाद भारत के इतिहास में जवाहरलाल नेहरू से लेकर अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों का कार्यकाल देख लिया। आखिरकार, सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच जिसमें शामिल जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी अंजारिया दोनों का जन्म भी तब नहीं हुआ था जब यह विवाद शुरू हुआ था। अब उन्होंने इस पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। यह पूरा मामला उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के नारसीपुर कलां गांव की 15.5 बीघा ज़मीन से जुड़ा है। इस विवाद की जड़ें 4 जून, 1957 की एक सेल डीड (बिक्री विलेख) से जुड़ी हैं, जिसके ज़रिए अपीलकर्ता शराफत अली के पूर्वजों ने यह ज़मीन खरीदी थी। निचली अदालत और हाई कोर्ट ने इस सेल डीड को अमान्य मान लिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने निचले न्यायालयों के फैसलों को पलटते हुए इस 70 साल पुरानी डीड को पूरी तरह वैध करार दिया और शराफत अली के पक्ष में न्याय का दरवाज़ा खोला। एक दिलचस्प पहलू ये भी है कि यह केस भारतीय न्याय व्यवस्था की कछुआ चाल को भी दर्शाता है और साथ ही इस भरोसे को भी मज़बूत करता है कि देर से ही सही, लेकिन कानून के घर में अंधेर नहीं है। जिस दस्तावेज़ को कोर्ट ने सही माना, वह देश के मौजूदा जजों की उम्र से भी ज़्यादा पुराना है!

इसे भी पढ़ें: Homebuyers को Supreme Court से बड़ी राहत, अब कब्ज़ा मिलने के बाद भी बिल्डर देगा मुआवज़ा।

यह दशकों पुराना विवाद हरिद्वार के नरसीपुर कला गांव की 15.15 बीघा जमीन से संबंधित था। इस जमीन को अपीलकर्ता शराफत अली और पूर्वजों ने 4 जून 19 57 को एक सेल डीड के माध्यम से खरीदा था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ट्रायल कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट के पिछले फैसले को पलटते हुए पुरानी सेल डीड को पूरी तरह वैध करार दिया है और इसी के साथ अपीलकर्ताओं को जमीन का असली मालिक माना है। जमीन की खरीद के समय शराफत अली के पूर्वज नाबालिक थे जिसका सीधा अर्थ है कि यह संपत्ति उनके पिता द्वारा खरीदी गई थी। इस मामले की लंबी कानूनी यात्रा के दौरान खुद शराफत अली का भी निधन हो गया और अंत उनके कानूनी उत्तराधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट में यह लड़ाई लड़ी।

इसे भी पढ़ें: केसी वेणुगोपाल का BJP-RSS पर गंभीर आरोप, Ram Mandir चंदे की SC से जांच की मांग

इस प्रकार एक ही परिवार की चार पीढ़ियां इस मुकदमेबाजी में उलझी रही। जस्टिस मिश्रा ने इस मामले का सार बताते हुए कहा कि यह विवाद म्यूटेशन की कारवाही से शुरू होकर यूपी जमींदारी अनुमूलन और भूमि सुधार अधिनियम 1950 और चकबंदी प्रक्रियाओं तक पहुंचा। हालांकि निचली अदालतों और अन्य मंचों पर अपीलकर्ताओं को निराशा ही हाथ लगी है। जिसके बाद उन्हें न्याय के लिए शीर्ष अदालत की शरण लेनी पड़ी। शुरुआत में जब खरीदार के नाम पर जमीन के म्यूटेशन की प्रक्रिया चल रही थी तब विक्रेता ने आपत्ति जताई थी। लेकिन बाद में राजस्व अधिकारियों को म्यूटेशन करने की अनुमति देने के लिए इसे वापस ले लिया।

इसे भी पढ़ें: Delhi Court का साफ संदेश: देर रात Call करने वाली महिला 'गलत' नहीं, प्राइवेसी अहम

कुछ समय बाद जब गांव में चकबंदी की कारवाही शुरू हुई तो अपीलकर्ताओं ने पाया कि रिकॉर्ड में मालिक के रूप में उनका नाम दर्ज नहीं है और जमीन अभी भी विक्रेता के नाम पर ही है। चकबंदी अधिकारी ने पुराने म्यूटेशन रिकॉर्ड के आधार पर अपीलकर्ताओं को मालिक दर्ज किया लेकिन विक्रेताओं ने इसे फिर चुनौती दे दी। इसके बाद नए सिरे से फैसले का आदेश हुआ। हालांकि विक्रेता ने एक समझौते के आधार पर फिर यूटर्न लिया और आपत्तियां वापस ले ली। लेकिन उस समझौते पर सभी पक्षों के हस्ताक्षर नहीं थे। इसीलिए कुछ वर्षों बाद अन्य लोगों ने अपीलकर्ताओं के मालिकाना हक को चुनौती दे दी। राजस्व विभाग ने आपत्तियों का यह दौर तब तक चलता रहा जब तक कि अपीलकर्ताओं ने ट्रायल कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया। ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए सेल डीड को शून्य घोषित कर दिया कि इसे भूमि सीलिंग कानून से बचने के लिए तैयार किया गया था। साल 2017 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी अपीलकर्ताओं की याचिका खारिज कर दी थी। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि रजिस्टर्ड सेल डीड की वैधता धोखाधड़ी या जालसाजी के लिए किसी ठोस आरोप का ना होना और गवाहों के बयानों में कोई विरोधाभास साबित ना कर पाना यह दर्शाता है कि चकबंदी अधिकारियों और इसी के साथ हाई कोर्ट के निष्कर्ष कानून की नजर में सही नहीं है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अपीलकर्ताओं के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है।

अन्य न्यूज़

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
बिहार विश्वविद्यालय कानून के विरोध में शिक्षक संघों का प्रदर्शन
मुकदमे

बिहार विश्वविद्यालय कानून के विरोध में शिक्षक संघों का प्रदर्शन

लोकसभा में ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश, 16 न्यायाधिकरणों के लिए निगरानी
मुकदमे

लोकसभा में ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश, 16 न्यायाधिकरणों के लिए निगरानी

मानदेय बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी गई लड़ाई
मुकदमे

मानदेय बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी गई लड़ाई

पिछली तारीख से टैक्स की देनदारी सही, लेकिन जुर्माना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
मुकदमे

पिछली तारीख से टैक्स की देनदारी सही, लेकिन जुर्माना नहीं: सुप्रीम कोर्ट

बिहार में गुजरात मॉडल की शराबबंदी लागू होनी चाहिए: जीतन राम मांझी
मुकदमे

बिहार में गुजरात मॉडल की शराबबंदी लागू होनी चाहिए: जीतन राम मांझी

दुर्गा कॉलोनी का दोबारा सर्वे: फरीदाबाद में 234 एकड़ जमीन की होगी जांच, प्लॉटधारकों को राहत की उम्मीद
मुकदमे

दुर्गा कॉलोनी का दोबारा सर्वे: फरीदाबाद में 234 एकड़ जमीन की होगी जांच, प्लॉटधारकों को राहत की उम्मीद

पिता को अदालत का झटका: बेटी की शिक्षा के लिए जमा पैसा भरण-पोषण में नहीं गिना जा सकता
मुकदमे

पिता को अदालत का झटका: बेटी की शिक्षा के लिए जमा पैसा भरण-पोषण में नहीं गिना जा सकता

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिलेगी दुर्गा बिल्डर कॉलोनी के प्लॉटधारकों को राहत
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिलेगी दुर्गा बिल्डर कॉलोनी के प्लॉटधारकों को राहत

ताज़ा ख़बरें