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सुप्रीम कोर्ट ने असम में विदेशी घोषित चार मुस्लिम महिलाओं के निर्वासन पर रोक लगाई

Maktoob के अनुसार · 24x7 NYAYA
सुप्रीम कोर्ट ने असम में विदेशी घोषित चार मुस्लिम महिलाओं के निर्वासन पर रोक लगाई
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने असम की चार मुस्लिम महिलाओं के निर्वासन को रोकने के लिए हस्तक्षेप किया है, जिनसे पहले उनकी नागरिकता का दर्जा छीन लिया गया था और राज्य विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा विदेशी नागरिक घोषित किया गया था।

पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके।

विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

अपराध

आरोपी को आरोप पत्र के दस्तावेजों तक पहुंच देना एक मौलिक अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

आरोपी को आरोप पत्र के दस्तावेजों तक पहुंच देना एक मौलिक अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को आरोप पत्र के दस्तावेजों तक पहुंच से वंचित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह उनके निष्पक्ष मुकदमे के अधिकार पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। अदालत ने कहा कि आरोपी को आरोप पत्र के सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने का अधिकार है जो उनकी रक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने असम ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित निर्वासन के 4 आदेशों को रोक दिया

सुप्रीम कोर्ट ने असम में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी नागरिक घोषित चार महिलाओं के निर्वासन पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने नोटिस जारी करते हुए केंद्र, असम सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।

अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

वकील

सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों से टकराव नहीं चाहता, टाइम बाउंड निपटारे की अर्जी खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने टाइमबाउंड निपटारे की मांग वाली अर्जी खारिज करते हुए कहा कि वह वकीलों से टकराव नहीं चाहते हैं। इसके साथ ही देशभर के कोर्ट्स में स्थगन पर गाइडलाइन बनाने की मांग पर सुनवाई से इनकार कर दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।

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