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अपराध

शादी से पहले सेक्स के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला, सरकारी नौकरी पर कोई असर नहीं होगा

The Lallantop के अनुसार · 24x7 NYAYA
शादी से पहले सेक्स के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला, सरकारी नौकरी पर कोई असर नहीं होगा
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शादी से पहले सेक्स करने वाले किसी व्यक्ति को सरकारी नौकरी से रोकने के लिए कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि दो बालिगों के बीच आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध खराब चरित्र का प्रमाण नहीं हैं।

कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा।

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

मुकदमे

912 करोड़ रुपये के बैंकिंग घोटाले में जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका

912 करोड़ रुपये के बैंकिंग घोटाले में जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका

सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है कि कोर्ट में 912 करोड़ रुपये के बैंकिंग घोटाले की जांच हो। इसमें एआरसी, सार्वजनिक बैंकों और नोएडा कंपनी से जुड़ा हुआ घोटाला शामिल है

विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की नई टिप्पणी: जमानत मामलों में निष्पक्षता और संतुलन की आवश्यकता

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत मामलों में निष्पक्षता और संतुलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता भारतीय संविधान का मूल अधिकार है और जमानत संबंधी मामलों में न्यायालयों को संरक्षित करना चाहिए।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गरीबों को न्याय मिलने के रास्ते को स्पष्ट किया

सुप्रीम कोर्ट ने गरीब और जरूरतमंद लोगों को दी जा रही मुफ्त कानूनी सहायता सेवाओं की समीक्षा करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अदालत ने गरीबों के न्याय पाने के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए यह पहल की है।

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

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