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वकील

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 50 वर्षीय महिला को क्रायोप्रिजर्व्ड भ्रूण स्थानांतरण की अनुमति दी

SCC Online के अनुसार · 24x7 NYAYA
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 50 वर्षीय महिला को क्रायोप्रिजर्व्ड भ्रूण स्थानांतरण की अनुमति दी
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक 50 वर्षीय महिला को क्रायोप्रिजर्व्ड भ्रूण स्थानांतरण से गुजरने की अनुमति दी है, यह सुनिश्चित करते हुए कि सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी विनियमन अधिनियम के तहत आयु सीमा उपचार की शुरुआत पर लागू होती है, जारी रखने पर नहीं।

अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी।

आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

फैसले

आईसीसी ने लॉर्ड्स और गद्दाफी स्टेडियम की पिचों पर जुर्माना लगाया, संतुलन की कमी का आरोप

आईसीसी ने लॉर्ड्स और गद्दाफी स्टेडियम की पिचों पर जुर्माना लगाया, संतुलन की कमी का आरोप

आईसीसी ने अपनी पिच और आउटफील्ड निगरानी प्रक्रिया के तहत लॉर्ड्स और पाकिस्तान के गद्दाफी स्टेडियम में इस्तेमाल की गई पिचों को असंतुष्ट करार दिया है। यह निर्णय पिचों की गुणवत्ता को सुधारने और खेल के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आईसीसी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

फैसले

न्याय के लिए समयसीमा क्यों जरूरी?

अदालतों में लंबे समय तक मामलों की जमानत एक बड़ी समस्या है। इसका मुख्य कारण प्रशासनिक ढिलाई है। मजबूत जांच, समयबद्ध प्रक्रिया और जवाबदेही के लिए समयसीमा तय करने से न्याय में विलंब कम किया जा सकता है।

मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके।

अपराध

न्याय व्यवस्था में सुधार की दिशा में सुप्रीम कोर्ट की चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है, đặcतौर पर 40 साल तक लंबित रहने वाली एक हत्या मामले की अपील के मद्देनज़र। यह स्थिति न्याय व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

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