गृहिणियों को 'राष्ट्र निर्माता' कहा, घरेलू देखभाल का मूल्य 30,000 रुपये तय

सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू देखभाल की वैल्यू को 30,000 रुपये तय किया है और कहा है कि गृहिणियां परिवार के अर्थव्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अदालत ने घरेलू कर्मचारियों की काम की मूल्य को स्वीकार किया है।
कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा।
पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।
अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

