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अपराध

सजा, तय करते समय कानून का कैसे पालन करना है: सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Live Law Hindi के अनुसार · 24x7 NYAYA
सजा, तय करते समय कानून का कैसे पालन करना है: सुप्रीम कोर्ट का फैसला
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी दोषी के खिलाफ लंबे समय तक समान प्रकार की किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में शामिल होने का कोई प्रमाण नहीं मिलता, तो यह सजा तय करते समय एक महत्वपूर्ण विचारणीय पहलू हो सकता है।

अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी।

आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया।

सुप्रीम कोर्ट

2026 लाइवलॉ (एससी) 642 | सराफत अली (मृत) एलआर एवं अन्य के माध्यम से। वी. उप निदेशक चकबंदी, हरिद्वार एवं अन्य।

2026 लाइवलॉ (एससी) 642 | सराफत अली (मृत) एलआर एवं अन्य के माध्यम से। वी. उप निदेशक चकबंदी, हरिद्वार एवं अन्य।

पंजीकृत विक्रय विलेख वैध माना गया; साक्ष्यांकन गवाह के विवरण में मामूली विसंगति निष्पादन को अमान्य नहीं करेगी: सुप्रीम कोर्ट

विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट

भारत और रूस ने सुप्रीम कोर्ट में तकनीक का सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए

भारत के सर्वोच्च न्यायालय और रूसी संघ के सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोनों न्यायपालिकाएं न्यायपालिका में डिजिटल परिवर्तन पर सहयोग बढ़ाएंगी।

मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके।

कानून

मऊ में उपभोक्ता को अदेय प्रमाणपत्र देने में अधिशासी अभियंता की कथित लापरवाही के मामले में स्पष्टीकरण मांगा

मऊ जिले में एक उपभोक्ता को विद्युत बिल का भुगतान करने के बाद भी अदेय प्रमाणपत्र देने में विफल रहने के मामले में स्थायी लोक अदालत ने अधिशासी अभियंता को तलब किया है। अदालत ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है कि क्यों नहीं दिया गया अदेय प्रमाणपत्र।

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

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