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सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी जेल में होने पर अदालत को तेजी से काम करने के लिए कहा

Live Law के अनुसार · 24x7 NYAYA
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी जेल में होने पर अदालत को तेजी से काम करने के लिए कहा
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अगर आरोपी जेल में होते हैं तो अदालत और अभियोजन पक्ष का कर्तव्य है कि सुनवाई में तेजी लाई जाए, सुनवाई में देरी कानूनी प्रक्रिया में असमानता को बढ़ावा देती है।

अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी।

आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया।

अपराध

पाकिस्तानी हत्याकांड पर बेल्जियम पीएम मेलोनी ने कैसी प्रतिक्रिया दी?

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एक पाकिस्तानी लड़की की हत्या के मामले में हुई अदालत की वारिसपूर्ण कार्रवाई पर बेल्जियम की प्रधानमंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया दी।

मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके।

मुकदमे

हिमाचल हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी: कानून सिर्फ जागरूककर्ता की मदद करता है, मूकदर्शक की नहीं

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक और संबद्ध सेवा परीक्षा (एचएएस) की मेरिट सूची में बदलाव पर याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि कानून का लाभ सिर्फ उन्हीं को मिलता है जो समय पर कोर्ट जाते हैं, न कि जो मूकदर्शक बने रहते हैं।

कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा।

अपराध

सुनवाई की देरी से न्यायिक अंतरात्मा झकझोरा, 9 साल की लंबी कैद के बाद जमानत में मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने 9 साल से अधिक समय से जेल में बंद हत्या के आरोपी लियाकत अली को जमानत देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि मुकदमे में हुई लंबी देरी ने उसकी न्यायिक अंतरात्मा को झकझोर दिया है।

आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

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