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अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया: निरस्त नियमों के तहत प्रोमोशन का अधिकार नहीं

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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया: निरस्त नियमों के तहत प्रोमोशन का अधिकार नहीं
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

सुप्रीम कोर्ट ने तय किया कि यदि कोई पद पूर्व नियमों के तहत बना है और वे नियम बाद में निरस्त कर दिए गए हैं, तो उस पद के लिए कर्मचारी को कोई अधिग्रहित अधिकार नहीं मिलता। यह निर्णय BSNL के कर्मचारियों के खिलाफ़ लिया गया जिसमें उन्हें पुराने नियमों के तहत प्रोमोशन का दावा किया गया था, लेकिन न्यायालय ने नया नियम लागू करने का निर्णय दिया।

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी।

कानून

सरकार का UPI पर MDR लगाने का विरोध से समर्थन तक का सफर

सरकार का UPI पर MDR लगाने का विरोध से समर्थन तक का सफर

एक साल पहले UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने की आलोचना करते हुए सरकार ने उसे गलत बताया था। अब सरकार UPI भुगतान में MDR लागू करने के पक्ष में खड़ी दिख रही है, जिससे चर्चा फिर से भड़क रही है।

अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

मुकदमे

फरीदाबाद में 3 अक्टूबर को परक्राम्य लिखत अधिनियम के विवादों के निपटारे के लिये विशेष लोक अदालत आयोजित

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर 3 अक्टूबर को विशेष लोक अदालत सत्र आयोजित किया जाएगा, जहाँ परक्राम्य लिखत अधिनियम से जुड़े लंबित अपील मामलों को आपसी सहमति और समझौते के माध्यम से शीघ्र निपटाया जाएगा। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं सचिव जितेंद्र सिंह ने पक्षकारों से इस अवसर का उपयोग करके अपने मामलों का समाधान करने का आग्रह किया है।

अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई को 2027 से कक्षा 6 में त्रि‑भाषा व्यवस्था अपनाने का कहा

न्यायालय ने सीबीएसई से अनुरोध किया कि वह अगले शैक्षणिक वर्ष 2027 से छठी कक्षा के छात्रों के लिए त्रि‑भाषा नीति को लागू करे, जबकि वर्तमान छात्रों को स्वेच्छा से इस विकल्प का उपयोग करने की अनुमति रहेगी। बोर्ड ने इस दिशा में कार्य करने के लिए एक विशेष समिति बनाई है, जो भाषा विकल्प, शिक्षकों की उपलब्धता और सामग्री की तैयारी का मूल्यांकन करेगी, और यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति‑2020 के अनुरूप है।

मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके।

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