सुप्रीम कोर्ट ने कहा: महिलाओं वकीलों पर POSH एक्ट नहीं लागू, अलग कानून की माँग

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि वकीलों का रोजगार संबंध पारंपरिक नहीं होने के कारण POSH एक्ट का सामान्य अनुप्रयोग उपयुक्त नहीं है और महिलाओं वकीलों के लिये अलग नियामक ढाँचे की आवश्यकता है। न्यायमूर्ति ने बारा काउंसिल ऑफ़ इंडिया और केंद्रीय तथा राज्य बार काउंसिल्स को एक विशेष ‘वकील‑विशेष’ नियमन तैयार करने का निर्देश दिया। इस दिशा में सुप्रीम कोर्ट के 2013 के नियमों को उदाहरण के तौर पर लिया गया और उच्च न्यायालय तथा अन्य न्यायिक संस्थानों में भी इसका प्रावधान सुझाया गया।
विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।
कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा।

