लोक अदालत से तेज न्याय: बगहा में न्यायाधीशों ने कार्यक्रम में बताया
बगहा में आयोजित कार्यक्रम में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीशों ने लोक अदालत को पारंपरिक विवाद समाधान का आधुनिक रूप बताया, जो सुलभ, सरल और त्वरित न्याय देता है तथा आर्थिक दोहन को रोकता है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में आपसी सहमति से मामलों का निस्तारण होने से समय और धन दोनों की बचत होती है तथा तैयारियों एवं बेंचों के गठन की विस्तृत जानकारी भी साझा की।

सौजन्य से:- Hindustan
लोक अदालत से त्वरित न्याय : एडीजे-1
बगहा में आयोजित एक कार्यक्रम में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीशों ने कहा कि लोक अदालत पारंपरिक विवाद समाधान का आधुनिक रूप है। यह न्याय को सुलभ और त्वरित बनाने के साथ-साथ आर्थिक दोहन को रोकने में मदद करता है। न्यायाधीशों ने लोक अदालत के लाभ और इसकी तैयारियों के बारे में भी जानकारी दी।
बगहा, हसं। राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर आयोजित कार्यक्रम में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम ने कहा कि लोक अदालत पारंपरिक तरीके से विवादों के आपसी समाधान का आधुनिक स्वरूप है। यह लोगों को सुलभ, सरल और त्वरित न्याय दिलाने के साथ ही आर्थिक दोहन को रोकने का भी प्रभावी माध्यम है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेन्द्र मिश्र ने कहा कि लोक अदालत में आपसी सहमति से मामलों का निस्तारण होने से समय और धन दोनों की बचत होती है। कार्यक्रम का संचालन द्वितीय श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी राहुल राज ने किया। वहीं एसडीजेएम सह सचिव अनुमंडल विधिक सेवा समिति आलोक कुमार चतुर्वेदी ने लोक अदालत की तैयारियों की जानकारी देते हुए मामलों के निष्पादन के लिए गठित विभिन्न बेंचों के संबंध में विस्तार से बताया।
मौके पर एडीजे द्वितीय रविरंजन, एसीजेएम प्रथम कीर्ति प्रसाद, एसीजेएम द्वितीय, एसपी राजेश कुमार, एसडीएम चांदनी कुमारी, एसडीपीओ निहार भूषण, एडीजीओ साक्षी कुमारी थीं।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
हा तिन्ह द्वारा प्रांतीय कानून प्रसार में डिजिटल क्रांतिकारी कदम

सीबीआई विशेष अदालत में नेटवर्क व्यवधान, कार्यवाही एक महीने से रुकाव में

गाजियाबाद में दिव्यांग गवाहों और आरोपी की पहुंच आसान, कोर्ट में व्हीलचेयर व स्ट्रेचर उपलब्ध

बेअदबी रोधी कानून के संशोधन पर मुख्यमंत्री का दृढ़ संदेश

धौलाना तहसील में सवर्ण समुदाय ने यूजीसी नियम और एससी‑एसटी अधिनियम के विरोध में धरना किया

संतग्रंथ सुरक्षा अधिनियम में बदलाव के लिये मुख्यमंत्री मान से हुई सात सदस्यीय तालमेल समिति की मुलाकात

12 दिसंबर को अगली लोक अदालत, ट्रैफिक चालानों की माफी का फिर से मौका

धामी सरकार ने नैनीताल में 1.822 हेक्टेयर जमीन को भू‑कानून के तहत राज्य में निहित किया
ताज़ा ख़बरें
- डिजिटल युग में संशोधित डाक अधिनियम: पोस्ट‑ऑडिट व डेटा ट्रेसिंग को सुदृढ़ करना
- डिजिटल अर्थव्यवस्था के चलते डाक कानून में आए परिवर्तन: नई परिभाषाएँ और डिजिटल लॉजिस्टिक्स
- कठुआ में विशेष लोक अदालत ने 3 एमएसीटी मामलों को 10.75 लाख रुपये में निपटाया
- स्थाई लोक अदालत: शीघ्र न्याय के लिए नई पहल, बताई नीतू जोशी की दृष्टि
- मांडर में 60‑दिवसीय विधिक जागरूकता अभियान: मुफ्त कानूनी सहायता की जानकारी
- गुयेन ट्राई सेकेंडरी स्कूल में पुलिस ने 532 छात्रों को सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण दिया
- नसीराबाद में राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी पर चर्चा
- 26 सितंबर 2026 धनु राशिफल: बहस से बचें, नियम-आधारित सफलता

