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सुप्रीम कोर्ट 10वी अनुसूची की व्याख्या पर सुनवाई करेगा, न्याय स्थगन चाहते हैं कपिल सिब्बल

सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल की याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी, जिसमें दसवीं अनुसूची की व्याख्या को चुनौती दी गई है जिससे सांसदों/विधायकों को राजनीतिक दलों के विलय के जरिए दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य होने से बचने की इजाजत मिलती है।

22 जुलाई 2026 को 03:14 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट 10वी अनुसूची की व्याख्या पर सुनवाई करेगा, न्याय स्थगन चाहते हैं कपिल सिब्बल

सौजन्य से:- Hindustan

सुप्रीम कोर्ट 10वी अनुसूची की व्याख्या संबंधी याचिका पर सुनवाई करेगा

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल की याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति जताई। इस याचिका में कपिल सिब्बल ने दशम अनुसूची की व्याख्या को चुनौती दी है, जिसका उपयोग सांसदों/विधायकों के राजनीतिक दलों के विलय के द्वारा दलबदल से बचने के लिए किया जा रहा है। सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता व पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल की एक याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई। याचिका में उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची की उस व्याख्या को चुनौती दी है जो सांसदों/विधायकों को राजनीतिक दलों के विलय के जरिए दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य होने से बचने की इजाजत देती है। शीर्ष अदालत ने सिब्बल को 27 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर को सहमति जताई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं वी. मोहना की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता सिब्बल ने याचिका का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत क्षमता से यह याचिका दायर की है और इसे तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

उन्होंने पीठ से कहा कि मैं खुद याचिकाकर्ता हूं। राज्यसभा सांसद सिब्बल ने पीठ से कहा कि कि याचिका में इस सवाल से जुड़ी है कि क्या संसद की संरचना उस तरीके से बदल सकती है, जैसा इस देश में हो रहा है और इस संदर्भ में दसवीं अनुसूची के अनुच्छेद-4 की व्याख्या किस प्रकार की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी तरह की अन्य याचिकाएं भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता सिब्बल ने ऐसे समय में यह याचिका दायर की है, जब आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के कुछ सांसदों ने दसवीं अनुसूची के तहत विलय के प्रावधानों का हवाला देते हुए सत्तारूढ़ भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों का दामन थामा है।

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