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ट्रंप के हस्ताक्षर से 100% टैरिफ पर भारत पर पड़ेगा बड़ा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026’ पर आज हस्ताक्षर कर सकते हैं, जिससे रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लग सकता है, जिसमें भारत भी शामिल है। बिल को सीनेट और प्रतिनिधि सभा में पारित किया गया है और अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिये भेजा गया है। भारत ने इस कानून पर कड़ा ऐतराज जताया है, चेतावनी देते हुए कि इससे भारत‑अमेरिका संबंधों पर असर पड़ सकता है।

18 सितंबर 2026 को 11:04 pm बजे
ट्रंप के हस्ताक्षर से 100% टैरिफ पर भारत पर पड़ेगा बड़ा असर

सौजन्य से:- livehindustan.com

100 फीसदी टैरिफ वाले कानून पर ट्रंप लगाएंगे मुहर? भारत के ऊपर पड़ेगा बड़ा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026’ पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इस बात की पुष्टि वाइट हाउस के एक अधिकारी ने की है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026’ पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इस बात की पुष्टि वाइट हाउस के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएनआई से की। बता दें कि अगर ऐसा होता है तो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी 100 परसेंट टैरिफ लगाएगा। इन देशों में भारत का भी नाम शामिल है। कानून का मसौदा हाल ही में अमेरिकी सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद प्रतिनिधि सभा में 262-159 के वोट से पारित हो गया। इसमें रूस की शैडो फ्लीट से जुड़ी नौकाओं के खिलाफ कदम भी शामिल हैं। अमेरिकी सरकार के अनुसार, इन जहाजों ने रूस को पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद ऊर्जा निर्यात जारी रखने में मदद की है। गौरतलब है कि भारत और चीन रूस से कच्चे तेलों के दो बड़े खरीदार हैं।

‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026’ को 16 सितंबर को हाउस में 262-159 वोटों से पास किया गया और अब इसे ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है। सीनेट पहले ही 86-11 वोटों से इस कानून को मंज़ूरी दे चुकी है। यह कानून खुद भारतीय सामानों पर 100 प्रतिशत टैरिफ नहीं लगाता है। इसके बजाय, यह राष्ट्रपति को रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदारों या मॉस्को को प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। हाउस में हुए वोट में 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सदस्य ने बिल का समर्थन किया, जबकि सात रिपब्लिकन और 152 डेमोक्रेट ने इसके खिलाफ वोट दिया। इस बिल के तहत, उन देशों को छूट मिल सकती है जो रूस के प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से कम आयात करते हैं।

क्या है भारत का रुख

भारत ने इस बिल को लेकर कड़ा ऐतराज जताया है। उसने कहा कि अगर इसे अमल में लाया जाता है तो भारत और अमेरिका के संबंधों पर असर पड़ सकता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की बेहतरी के लिए कोई भी कदम उठा सकता है। यह भी कहा गया है कि भारत ने इस कानून को बारीकी से समझा है। इसे सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के संदर्भ में भी समझा गया है।

वहीं, चीन ने भी चीन ने रूसी तेल और गैस की खरीद पर शुल्क लगाने संबंधी अमेरिकी क्षेत्राधिकार को खारिज किया है। उसने कहा कि किसी भी देश के साथ उसके सामान्य व्यापार और आर्थिक सहयोग में तीसरे पक्ष का दखल या दबाव नहीं होना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन ऐसी किसी भी कार्रवाई का विरोध करता है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी न मिली हो। गुओ ने कहा कि चीन समानता और पारस्परिक लाभ के आधार पर दूसरे देशों के साथ सामान्य आर्थिक और व्यापारिक सहयोग करता है।

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