सुप्रीम कोर्ट ने चीनी‑एथेनॉल मुआवजा दावों के 103.4 अरब रियाल के मुद्दे को पूर्ण पीठ तक पहुँचाया
न्यायाधीश गिल्मार मेंडेस ने सरकार को दी गई कीमत‑नियंत्रण से हुए नुकसान के प्रमाण के मानदंड को लेकर असमानता को देखते हुए इस विवाद को पूरी सुप्रीम कोर्ट की पीठ के समक्ष भेजा है। कुल दावों का मूल्य लगभग 103.4 अरब रियाल बताया गया है, जिसे सरकारी बजट पर भारी भार पड़ने की आशंका है। अब वर्चुअल सुनवाई के बाद पूर्ण पीठ यह तय करेगी कि व्यक्तिगत नुकसान प्रमाणित करना आवश्यक है या नहीं।

सौजन्य से:- ChiniMandi
ब्रासीलिया : सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश गिल्मार मेंडेस ने चीनी और एथेनॉल उत्पादकों द्वारा संघीय सरकार से मांगे गए मुआवजे से जुड़े मामले को सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण पीठ के समक्ष भेज दिया है। इन दावों की कुल वित्तीय राशि करीब 103.4 अरब ब्राजीलियाई रियाल है। मामले में अलग-अलग न्यायिक फैसलों के बीच असंगति और सरकारी खजाने पर पड़ने वाले संभावित वित्तीय प्रभाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। मेंडेस का आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। अब सुप्रीम कोर्ट की दूसरी पीठ की वर्चुअल सुनवाई में इसकी पुष्टि की जाएगी। यह सुनवाई शुक्रवार से 2 अक्टूबर तक प्रस्तावित है।
मुआवजे के लिए वास्तविक नुकसान साबित करने का मुद्दा
मामले के केंद्र में यह सवाल है कि, चीनी और एथेनॉल उत्पादकों को सरकार द्वारा नियंत्रित कीमतों के कारण हुए नुकसान को साबित करने के लिए किन मानकों को पूरा करना होगा। सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा मिसालों के अनुसार, उत्पादकों को व्यक्तिगत विशेषज्ञ आकलन के माध्यम से वास्तविक नुकसान साबित करना होता है। न्यायमूर्ति मेंडेस का कहना है कि, इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों में एकरूपता नहीं रही है। उनके अनुसार, पूर्ण पीठ को ऐसी स्थिति में एक समान कानूनी व्याख्या तय करनी चाहिए, जहां कंपनियों को व्यक्तिगत आकलन के बजाय व्यापक अध्ययनों के आधार पर मुआवजा देने का फैसला किया गया हो।
सरकार पर 103.4 अरब रियाल का संभावित वित्तीय जोखिम
मेंडेस ने मामले के सरकारी वित्त पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव की ओर भी ध्यान दिलाया है। सरकार के बजट दिशानिर्देशों से जुड़े राजकोषीय जोखिम संबंधी दस्तावेज के अनुसार, इन मुआवजा दावों से संबंधित मुकदमों से सरकार पर करीब 103.4 अरब ब्राजीलियाई रियाल का वित्तीय जोखिम जुड़ा है। यह राशि उन सभी मुकदमों की कुल अनुमानित राशि की लगभग पांचवीं हिस्सेदारी के बराबर है, जिन्हें ब्राजील सरकार वर्तमान में संभावित राजकोषीय जोखिम वाले मामलों के रूप में वर्गीकृत करती है। मेंडेस ने कहा कि, यह वित्तीय बोझ आगे और बढ़ सकता है, क्योंकि अदालत के आदेशों से उत्पन्न सरकारी देनदारियों का भुगतान आम तौर पर समय के साथ किया जाता है और इस दौरान देनदारी जमा होती रहती है। उन्होंने चेतावनी दी कि ये दावे अगले वर्ष से सरकार के राजकोषीय लक्ष्य पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं और ऐसे सरकारी खर्च को सीमित कर सकते हैं, जो अनिवार्य श्रेणी में नहीं आते।
विवाद की जड़ 1980-90 के दशक की मूल्य नियंत्रण व्यवस्था
मुआवजे के मूल दावे 1980 और 1990 के दशक में चीनी और एथेनॉल की कीमतों पर लागू सरकारी नियंत्रण से जुड़े हैं।उत्पादकों का कहना है कि तत्कालीन शुगर एंड अल्कोहल इंस्टीट्यूट द्वारा निर्धारित कीमतों के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ था और इसके लिए संघीय सरकार को मुआवजा देना चाहिए। हालांकि, न्यायमूर्ति मेंडेस का रुख रहा है कि केवल यह साबित कर देना पर्याप्त नहीं है कि सरकार द्वारा निर्धारित कीमतें बाजार मूल्य से कम थीं। उनके अनुसार, प्रत्येक उत्पादक को अलग-अलग तकनीकी आकलन के माध्यम से अपना वास्तविक नुकसान साबित करना चाहिए। अब सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण पीठ की समीक्षा यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है कि व्यक्तिगत नुकसान साबित करने की यह आवश्यकता सरकार के सामने लंबित बड़ी संख्या में मुआवजा दावों पर एक समान रूप से लागू होगी या नहीं।
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