टिकट न मिलने पर भी 8 लाख का मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी परिवार को
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए मृतक के परिवार को 8 लाख रुपये और ब्याज देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि ट्रेन का टिकट न मिलना मुआवजा अधिकार को रोक नहीं सकता, क्योंकि पीड़ित वास्तविक यात्री था। यह राशि 30 दिनों के भीतर दी जाएगी।

सौजन्य से:- ABP News
खो गया टिकट तो भी रेलवे देगा हर्जाना, कोर्ट ने पीड़ित के हक में सुनाया फैसला
ट्रेन हादसे में यात्री की मौत के बाद टिकट न मिलने पर रेलवे ने मुआवजा रद्द कर दिया. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का फैसला पलटकर पीड़ित परिवार को 8 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है.
ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है. मामला एक ट्रेन हादसे में यात्री की मौत हो जाने के कारण उसके परिवार को मुआवजा नहीं मिलने का है. सवाल यह था कि क्या ट्रेन का टिकट नहीं मिलने पर पीड़ित परिवार मुआवजे के अधिकार से वंचित हो जाएगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, मामला गुजरात का बताया जा रहा है और घटना 27 सितंबर साल 2017 की है. महेशभाई नामक एक रेल यात्री जर्नल डिब्बे से सफर कर रहे थे, लेकिन अचानक से यात्रा के दौरान ट्रेन में जोर से झटका लगने के कारण वह ऊपर की बर्थ ने सीधे नीचे जा गिरे, जिसके कारण उनको काफी अधिक चोटें लगी और करीब एक महीने तक उसका इलाज चलता रहा. बाद में खबर आई कि 31 अक्तूबर 2017 को उनकी मौत हो गई.
माता-पिता ने मांगा मुआवजा
जब महेशभाई के माता-पिता ने रेलवे से मुआवजे कि मांग कि तब रेलवे क्लेम ट्रिब्यूलन ने 17 जून साल 2022 को पूरे मामले को दुर्घटनावश मानते हुए अपनी गलती मानी और साथ ही में मृतक के माता-पिता को 8 लाख रुपये मुआवजा और 9 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का फैसला किया.
लेकिन जब यह मामला कोर्ट तक पहुंचा तब यह मुआवजा रद्द कर देने का फैसला सामने रखा गया. हाई- कोर्ट का कहना था कि मृतक के पास से ट्रेन टिकट नहीं मिलने को अहम आधार माना गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का आदेश पलटा
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइंया और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ ने हाई- कोर्ट के इस फैसले को खारिज करने का निर्देश सुनाया.कोर्ट का यह कहना था कि सिर्फ टिकट के ना मिलने पर मिले हुए मुआवजे को रद्द कर देना सही साबित नहीं माना जा सकता है.
कोर्ट ने मृतक के पिता से मिले ब्यान और अस्पताल में लंबे समय तक इलाज समेत पूरे को ध्यान में रखा, पीठ के अनुसार बताया गया कि उपलब्ध सभी परिस्थितियों से यह माना जाता है कि महेशभाई एक वास्तविक यात्री के तौर पर सफर कर रहें थे.
30 दिन में दिये जायेंगे 8 लाख रुपये
सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे द्वारा दिया गया 8 लाख रुपये का मुआवजा बहाल कर दिया गया है. अदालत ने निर्देश दिया कि यह रकम मृतक के माता-पाता को 30 दिनों के अंदर दी जाए. कोर्ट ने यह भी साबित करा कि टिकट समेत कुछ और भी सामान हादसे के बाद नहीं मिल पाये, और इलाज के दौरान टिकट का सुरक्षित रहना जरूरी नहीं है.
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