कैमूर में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन
12 सितंबर 2026 को कैमूर के कोर्ट परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित होगी, जहाँ ट्रैफिक चालान पर 50 प्रतिशत छूट सहित विभिन्न सुलहनीय वादों का त्वरित निपटारा होगा। इस मंच पर आपसी बातचीत से मामलों को एक ही दिन में समाप्त किया जाएगा, बिना कोर्ट फीस या वकील खर्च के, और निर्णय अंतिम होगा।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
- Hindi News
- Local
- Bihar
- Kaimur
- Bhabua
- Kaimur: National Lok Adalat To Be Held On 12th In The Court Premises
कैमूर:कोर्ट परिसर में 12 को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत
- कॉपी लिंक
व्यवहार न्यायालय भभुआ एवं अनुमंडलीय न्यायालय मोहनिया में 12 सितंबर 2026 शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन होगा।प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार, कैमूर श्रीअनुराग के निर्देश पर यह अदालत लगेगी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार कैमूर की ओर से जानकारी दी गई है कि इस लोक अदालत में आम लोगों की सुविधा के लिए ट्रैफिक चालान के मामलों में 50 प्रतिशत की विशेष छूट दी जाएगी। इसके साथ ही सभी प्रकार के सुलहनीय वादों का त्वरित निष्पादन किया जाएगा।लोक अदालत में मुकदमे से पूर्व के वाद, सुलहनीय आपराधिक वाद, एनआई एक्ट 138 चेक बाउंस, बैंक ऋण वसूली, मोटर दुर्घटना दावा, वैवाहिक व पारिवारिक विवाद, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण, राजस्व मामले, बीएसएनएल बिल विवाद, ट्रैफिक चालान, बिजली-पानी बिल विवाद, सेवा संबंधी वेतन-भत्ता एवं अन्य दीवानी मामलों का आपसी सुलह समझौते के आधार पर निष्पादन किया जाएगा।
लोक अदालत के फायदे ः लोक अदालत में मामलों का निपटारा आपसी बातचीत और सौहार्दपूर्ण माहौल में होता है। वर्षों से लंबित मामले एक ही दिन में खत्म हो जाते हैं। इसमें किसी पक्ष को सजा नहीं होती, कोर्ट फीस नहीं लगती और वकील का खर्च भी बचता है। मुआवजा तुरंत मिल जाता है और इसका फैसला अंतिम होता है, जिसके खिलाफ अपील नहीं होती।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट बार में चुना गया डॉ. ब्रजेश कुमार शर्मा, गोपालगंज को मिली सम्मानित पहचान

कुसीयारगांव में विश्व पर्यटन दिवस पर आयोजित विधिक जागरूकता शिविर

सुप्रीम कोर्ट में आज हो सकती है जम्मू‑कश्मीर के राज्य दर्जे पर सुनवाई

दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट में भ्रष्ट जजों की गिनती भूलने का आरोप लगाया

सीईसी की आजीवन प्रतिरक्षा: जवाबदेही से दूर एक खतरनाक कदम

लाइक्स की चाह में सड़क पर स्टंट करने वाले नाबालिग को नहीं मिली जमानत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने सत्र न्यायालय का आदेश बरकरार रखा

2000 से अधिक नागरिकों ने CJI से SIR प्रक्रिया पर स्वयं‑मोटु कार्यवाही की मांग की

शिवहर में निःशुल्क कानूनी सहायता के लिए जागरूकता अभियान
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट में यूपीआई‑एमडीआर को चुनौती का मुक़दमा
- सुप्रीम कोर्ट में भ्रष्ट न्यायाधीशों का जाल: दुश्यंत दवे का खुलासा
- सुप्रीम कोर्ट में 2000 रुपये से ऊपर के यूपीआई लेनदेन पर 0.4% एमडीआर की वैधता पर सुनवाई
- सुप्रीम कोर्ट में 2,000 रुपये से ऊपर के UPI लेन‑देनों पर 0.4% शुल्क को लेकर याचिका पर सुनवाई
- सुप्रीम कोर्ट ने 0.4% यू.पी.आई. व्यापारिक लेनदेन शुल्क को चुनौती देने वाले याचिका पर सुनवाई तय की
- हिंदू परिवार की सहदायिक संपत्ति में बेटियों को मिलता है बराबर हिस्सा
- दुमका लोक अदालत में छह विवादों का निपटारा, 81.32 लाख की समझौता राशि तय
- कोडरमा की लोक अदालत ने 16 मामलों का निपटारा, 15.58 लाख रुपये की समेट

