मथुरा में लोक अदालत के प्रचार वाहन को हरी झंडी, 12 सितंबर की राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए तैयार
जिला न्यायाधीश विकास कुमार ने दो जागरूकता वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो शहर‑ग्राम दोनों में राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्देश्य, सुलझाए जाने वाले मामलों और लाभों की जानकारी देंगे। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की कि अपने अटके हुए विवादों को लोक अदालत में लाकर आपसी सहमति से निपटें, ताकि तेज़, सस्ता और सुलभ न्याय मिल सके।

सौजन्य से:- bhaskar.com
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लोक अदालत के लिए प्रचार वाहन रवाना:मथुरा न्यायाधीश ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना, 12 सितंबर को होगी राष्ट्रीय लोक अदालत
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मथुरा में 12 सितंबर 2026 को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के लिए न्याय विभाग ने प्रचार अभियान तेज कर दिया है। इसी कड़ी में मंगलवार को दोपहर करीब 2 बजे जनपद न्यायालय परिसर से जनपद न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष विकास कुमार ने दो प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी और पराविधिक स्वयंसेवक मौजूद थे।
ये दोनों प्रचार वाहन शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी जाएंगे। इनके जरिए लोगों को राष्ट्रीय लोक अदालत के मकसद, इसमें सुलझाए जाने वाले मामलों और इसके फायदों के बारे में बताया जाएगा। साथ ही लोगों को अपने अटके हुए और सुलझाने लायक मामलों को लोक अदालत के जरिए निपटाने के लिए जागरूक किया जाएगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में ऐसे कई मामले सुलझाए जा सकते हैं, जिनमें दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद खत्म करना चाहते हैं। लोक अदालत का मकसद लोगों को आसान, जल्द और कम खर्च में न्याय दिलाना है। इसके जरिए लंबे समय से चल रहे विवादों को आपसी सहमति से सुलझाकर लोगों को राहत देने की कोशिश की जाती है।
इस कार्यक्रम में अपर जिला जज अमर पाल सिंह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नितिन कुमार, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रेलवे सूर्यभान कुमार वर्मा और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मथुरा की सचिव अनीता सिंह मौजूद थीं। इनके अलावा, कई अन्य न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी और लीगल एड डिफेंस काउंसिल के सदस्य भी उपस्थित थे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनीता सिंह ने लोगों से अपील की है। उन्होंने कहा कि जिनके मामले राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलझाए जा सकते हैं, वे खुद या अपने वकील के जरिए लोक अदालत में आएं और आपसी सहमति से मामलों को निपटाएं। न्यायिक विभाग का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा योग्य मामलों को सुलझाकर आम लोगों को जल्द राहत दी जाए।
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