होम›मुकदमे›157 साल पुराना ईसाई तलाक कानून: केरल हाई कोर्ट ने सिफारिश की बदलाव की
मुकदमे

157 साल पुराना ईसाई तलाक कानून: केरल हाई कोर्ट ने सिफारिश की बदलाव की

केरल हाई कोर्ट ने 157 साल पुराने ईसाई तलाक अधिनियम में बदलाव की सिफारिश की है, जो घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए न्याय पाने में बाधा बन रहा है. इस कानून के तहत महिलाओं को लंबी और असुरक्षित यात्राएं करनी पड़ती हैं.

11 जुलाई 2026 को 11:13 am बजे
157 साल पुराना ईसाई तलाक कानून: केरल हाई कोर्ट ने सिफारिश की बदलाव की

सौजन्य से:- Jagran

ईसाई महिलाओं के लिए मुसीबत बना 157 साल पुराना तलाक कानून, केरल HC ने सरकार से की बदलाव की सिफारिश

केरल हाई कोर्ट ने 157 साल पुराने ईसाई तलाक अधिनियम, 1869 में बदलाव की सिफारिश की है, क्योंकि यह कानून घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए न्याय पाना म ...और पढ़ें

HighLights

- केरल हाई कोर्ट ने ईसाई तलाक कानून 1869 में बदलाव सुझाए

- घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं को न्याय में आ रही बाधाएं

- मौजूदा कानून महिलाओं को लंबी यात्राओं पर मजबूर करता है

डिजिटल डेस्क, तिरुवनंतपुरम। केरल हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और संसद से ईसाई महिलाओं से जुड़े 157 साल पुराने 'तलाक अधिनियम, 1869' में बदलाव करने की सिफारिश की है।

केरल कोर्ट ने यह कदम घरेलू हिंसा की शिकार एक ईसाई महिला की याचिका पर सुनवाई के दौरान उठाया, जिसकी तलाक की अर्जी को फैमिली कोर्ट ने सिर्फ यह कहकर खारिज कर दिया था क्योंकि तलाक अधिनियम 1869 के तहत केस वहीं दर्ज हो सकता है जहां शादी हुई हो।

क्या है कानून

कानून की धारा 3(3) के अनुसार, ईसाई जोड़े केवल तीन ही जगहों की कोर्ट में तलाक का केस दर्ज कर सकते हैं। पहला- जहां उनकी शादी हुई थी, दूसरा जहां पति-पत्नी वर्तमान में एक साथ रह रहे हों और तीसरा पति-पत्नी वर्तमान में एक साथ रह रहे हों

हालांकि, इस पुराने कानून में यह प्रावधान नहीं है कि पीड़ित महिला जहाँ वर्तमान में रह रही है या शरण लिए हुए है, वहाँ से केस लड़ सके, जिसके कारण महिलाओं को न्याय के लिए लंबी, खर्चीली और असुरक्षित यात्राएं करने पर मजबूर होना पड़ता है।

महिलाओं के लिए और क्या है विकल्प?

ऐसे मामले में महिला को हले कासरगोड कोर्ट में तलाक का केस दर्ज कराना होगा। इसके बाद वह तुरंत हाई कोर्ट में ट्रांसफर पिटीशन दायर कर सकती है। दोनों जिले केरल में हैं, ऐसे में तुरंत हाई कोर्ट में ट्रांसफर पिटीशन दायर कर सकती है। यदि पति-पत्नी दोनों अलग राज्यों में रहते तो केस ट्रांसफर कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ता।

खबरें और भी

ऐसे मामले पहले भी आ चुके हैं सामने

साल 2001 में कानूनी चुनौती के बाद डिवोर्स एक्ट, 1869 की भेदभाव वाली धाराओं में संशोधन हुआ था। संसद ने कानून बदलकर ईसाई महिलाओं और पुरुषों को तलाक के मामले में बराबर का अधिकार दिया।

इसी तरह 1986 में मैरी रॉय केस में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सीरियाई ईसाई महिलाओं को पैतृक संपत्ति में पुरुषों के बराबर अधिकार देने का आदेश दिया था।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
ECI के दावे पर संदेह: क्या सुप्रीम कोर्ट ने नया फॉर्म‑6 घोषणा मंज़ूर किया?
मुकदमे

ECI के दावे पर संदेह: क्या सुप्रीम कोर्ट ने नया फॉर्म‑6 घोषणा मंज़ूर किया?

बबेरू के दूकानदारों को सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश, विवाद में मिली राहत
मुकदमे

बबेरू के दूकानदारों को सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश, विवाद में मिली राहत

तेलंगाना हाईकोर्ट ने SRSP विस्थापित महिला को कृषि भूमि न मिलने पर सरकार को किया कड़ा सवाल
मुकदमे

तेलंगाना हाईकोर्ट ने SRSP विस्थापित महिला को कृषि भूमि न मिलने पर सरकार को किया कड़ा सवाल

फु क्वोक में छात्र मॉक ट्रायल से कानूनी ज्ञान और सामाजिक कौशल हासिल करते हैं
मुकदमे

फु क्वोक में छात्र मॉक ट्रायल से कानूनी ज्ञान और सामाजिक कौशल हासिल करते हैं

हाईकोर्ट ने किठौर मामले में आरोपी की जमानत अस्वीकृत, गवाहों पर दबाव की सम्भावना को प्राथमिकता दी
मुकदमे

हाईकोर्ट ने किठौर मामले में आरोपी की जमानत अस्वीकृत, गवाहों पर दबाव की सम्भावना को प्राथमिकता दी

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में 16,726 अवैध निर्माणों को सील‑ध्वस्त करने का आदेश दिया
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में 16,726 अवैध निर्माणों को सील‑ध्वस्त करने का आदेश दिया

हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को चेतावनी: इलाज में देरी नहीं, २५,००० रुपये जुर्माना
मुकदमे

हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को चेतावनी: इलाज में देरी नहीं, २५,००० रुपये जुर्माना

MP उच्च न्यायालय में याचिकाओं से टैक्‍स ऑडिट डेडलाइन पर बढ़े प्रश्न
मुकदमे

MP उच्च न्यायालय में याचिकाओं से टैक्‍स ऑडिट डेडलाइन पर बढ़े प्रश्न

ताज़ा ख़बरें