होममुकदमेकर्नाटक के नए कानून से RSS पर क्या मकसद?
मुकदमे

कर्नाटक के नए कानून से RSS पर क्या मकसद?

कर्नाटक सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर शिकंजा लगाने के लिए एक नए कानून को मंजूरी दे दी है। इस कानून का मकसद सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्तियों के इस्तेमाल को नियंत्रित करना है, लेकिन RSS के लिए यह एक बड़ी चुनौती हो सकती है।

14 अगस्त 2026 को 03:56 am बजे
कर्नाटक के नए कानून से RSS पर क्या मकसद?

सौजन्य से:- Navbharat Times

कर्नाटक सरकार ने 'कर्नाटक सरकारी परिसर और सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग के नियमन से संबंधित विधेयक, 2026' को मंजूरी दे दी है। बताया जा रहा है कि इस कानून को लाने के पीछे असली मकसद आरएसएस पर शिकंजा कसना है। आरएसएस अपनी शाखा नहीं लगा पाएगी और उससे संघ को चोट पहुंचेगी।

बेंगलुरु : गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने बताया कि कर्नाटक कैबिनेट ने 'कर्नाटक सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग के नियमन विधेयक, 2026' को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट बैठक के बाद एक बयान में प्रियांक खरगे ने कहा कि इस विधेयक का मकसद निजी व्यक्तियों, संगठनों, संघों और सोसायटियों द्वारा सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्ति के इस्तेमाल के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करना है। माना जा रहा है कि यह कानून सीधे तौर पर राष्ट्रीय स्वयं सेव संघ को प्रभावित करेगा। प्रियांक खरगे बीते कई दिनों से साफ बयान दे रहे थे कि कर्नाटक में संघ को बैन किया जाएगा।

प्रियांक खरगे ने कहा कि यह विधेयक सरकारी जमीनों, इमारतों, खेल के मैदानों, पार्कों, सड़कों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण और जिम्मेदारी से इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। साथ ही, यह इनके दुरुपयोग को रोकता है और जनहित व भलाई के लिए इनकी रक्षा करता है।

नए कानून पर क्या बोले प्रियांक खरगे

प्रियांक खरगे ने आगे कहा कि इस कानून का मकसद जवाबदेही सुनिश्चित करना और सार्वजनिक संपत्तियों के अनधिकृत इस्तेमाल को रोकना है। इस अटकल पर कि यह विधेयक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को निशाना बनाने के लिए है प्रियांग खरगे ने कहा कि सरकार के मन में कोई खास संस्था नहीं है। मंत्री ने कहा कि हर कोई यह क्यों सोच रहा है कि यह किसी खास संस्था, संघ, संगठन, सोसाइटी, क्लब, यूनियन, सिंडिकेट या NGO पर रोक लगाने या उसे नियंत्रित करने के लिए है? मेरी समझ से बाहर है।

क्या है कर्नाटक का नया कानून

अधिकारियों के अनुसार, विधेयक में कार्यक्रमों, बैठ इसमें सरकारी संपत्तियों के इस्तेमाल की अनुमति देने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और प्रक्रियाएं प्रस्तावित हैं। इसमें सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग या नुकसान की स्थिति में जुर्माने के प्रावधान भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में कई जगहों पर सरकारी मैदानों, पार्कों और सामुदायिक भवनों का इस्तेमाल बिना अनुमति के कार्यक्रमों, बैठकों और निजी कामों के लिए किया जा रहा था। इससे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा था और आम लोगों को दिक्कत हो रही थी। नए विधेयक में स्पष्ट प्रावधान होंगे कि कौन, कब और किस शर्त पर सरकारी परिसर का इस्तेमाल कर सकता है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया, शुल्क और जिम्मेदारी तय की जाएगी। उल्लंघन करने पर जुर्माने और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है।

सरकार का तर्क है कि यह कानून किसी एक समुदाय या संगठन के खिलाफ नहीं है। इसका मकसद सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि टैक्सपेयर के पैसे से बनी संपत्तियों का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से और जनहित में हो।

मोहन भागवत को प्रियांक खरगे ने लिखा था लेटर

2025 से ही खरगे RSS के सार्वजनिक संपत्ति और सरकारी परिसरों के इस्तेमाल का विरोध करते रहे हैं और संगठन से औपचारिक रूप से पंजीकरण कराने की मांग करते रहे हैं। जून 2026 में, खरगे ने RSS को एक खुला पत्र लिखकर उसके कानूनी दर्जे, वित्तीय पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही पर स्पष्टता मांगी थी, क्योंकि संगठन अपने अस्तित्व के 100 साल पूरे कर रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन भारत और विदेशों में 60,000 से ज्यादा शाखाओं और करोड़ों स्वयंसेवकों का दावा करता है। उसकी सार्वजनिक जीवन में अहम मौजूदगी है और इसलिए उसे पारदर्शिता, जवाबदेही और संवैधानिक अनुपालन के उच्चतम मानकों का पालन करना चाहिए।

लेखक के बारे मेंशशि मिश्राशशि पांडेय मिश्रा नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में प्रिंसिपल डिजिटल कॉन्टेंट प्रॉड्यूसर (Principal Digital Content Producer) हैं। वह नवभारत टाइम्स में महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, बंगाल, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र-प्रदेश, पंजाब-हरियाणा, केरल, गोवा समेत नॉर्थ ईस्ट के राज्य की खबरों पर काम करती हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल पत्रकारिता में उनका 18 साल का लंबा अनुभव है। इस दौरान उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। शशि पांडेय मिश्रा ने सितंबर 2017 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था। उन्होंने अपनी पत्रकारिता के दौरान राजनीति, क्राइम, ह्यूमन ऐंगल स्टोरीज पर काम किया। इस दौरान समाजिक मुद्दों से जुड़े कई स्टिंग भी किए। कई स्पेशल खबरें कीं, जो नेशनल स्तर पर सुर्खियां बनीं। नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में गुजरात चुनाव के दौरान स्पेशल ग्राउंड स्पोर्टिंग की। देश की राजनीति, पर्यावरण, महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दे और क्राइम की खबरें लिखना पसंद है।

देश का राजनीतिक तनाव हो या कूटनीतिक घटनाक्रम, सबसे पहले खबर देना। उस खबर से भारत पर और लोगों पर क्या असर पड़ेगा इस पर काम करना प्राथमिकता है। इसके अलावा भारत और दुनिया भर में बसे हिंदी के पाठकों को खास खबर, खबर की सत्यता, पुष्ट खबरें और वीडियो के जरिए विश्लेषण देना शशि पांडेय मिश्रा की पहली प्राथमिकता रहती है।

विशेषज्ञता- भारत का राजनीतिक घटनाक्रम, पर्यावरण, क्राइम, स्वास्थ्य, महिलाओं और बच्चों से संबंधित मुद्दों पर लिखना

पत्रकारिता अनुभव: अखबार, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल मीडिया में 18 साल से कार्यरत

शशि पांडेय मिश्रा ने साल 2007 में पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक जागरण से की। उससे पहले अमर उजाला में इंटर्नशिप की। दैनिक जागरण के बाद आई नेक्स्ट में काम किया। फिर सहारा समय चैनल जॉइन किया। लेकिन लेखन का शौक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से वापस प्रिंट की तरफ ले आया। लखनऊ में कैनविज टाइम्स में काम किया और उसके बाद नवभारत टाइम्स अखबार में। यहां से नवभारत टाइम्स के डिजिटल प्लेटफॉर्म में काम की शुरुआत की। नवभारत टाइम्स वेबसाइट में काम करते हुए शानदार कवरेज के लिए कई बार संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया है। इससे पहले भी हर संस्थान में बेस्ट रिपोर्टिंग के अवॉर्ड मिले।

शशि पांडेय मिश्रा ने कानपुर यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में पोस्ट ग्रैजुएनशन किया है। उसके अलावा विद्या इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट और जर्नलिज्म से पत्रकारिता की पढ़ाई की।

पुरस्कार: दैनिक जागरण कानपुर में पहली महिला पत्रकार होने का सम्मान मिला। आईनेक्स्ट में बेस्ट रिपोर्टर का अवॉर्ड, नवभारत टाइम्स अखबार में बेस्ट रिपोर्टर का अवॉर्ड, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में भी अवॉर्ड मिला।

शशि पांडेय मिश्रा की स्पेशल खबरें

- सरकारी शेल्टर होम में अव्यवस्थाओं के लेकर स्पेशल खबर की। यहां अंदर कोई नहीं जा सकता था तो इस दौरान सफाई कर्मचारी बनकर अंदर गई और स्टिंग किया।

- कानपुर में राहुल गांधी की स्पेशल विजिट के दौरान डॉक्टर बनकर अस्पताल के अंदर गई और स्पेशल खबर निकाली।

- कानपुर जू में जानवरों की हालत और प्रदूषण पर लगातार स्पेशल स्टोरीज कीं, इन छपी खबरों के अखबार संसद के अंदर लहराकर मेनका गांधी ने सवाल उठाए। खबरों को संज्ञान लिया गया और बड़ा एक्शन हुआ।

- लखनऊ में विधानसभा से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक खिलौना पिस्तौल लेकर अंदर घुसी, लखनऊ के नामी स्कूलों में भी पिस्तौल लेकर घूमी और सुरक्षा में सेंध का स्टिंग किया।

- केंद्र सरकार की पालना गृह योजना में हजारों करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा किया। खबरों को हाई कोर्ट ने संज्ञान में लिया और मामले में सीबीआई जांच बैठी।

- महिला सुरक्षा की जांच के लिए पूरी दिन और आधी रात तक 30 किलोमीटर पैदल चली और सुरक्षा के इंतजाम की पोल खोली।

- मायावती के सीएम रहने के दौरान स्पेशल खबर के लिए उस अस्पताल में मरीज बनकर भर्ती हुई, जहां उनकी विजिट थी और स्पेशल कवेज की।... और पढ़ें

कन्वर्सेशन शुरू करें

Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों की लेबलिंग पर सरकार से किया सवाल
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों की लेबलिंग पर सरकार से किया सवाल

न्याय का त्वरित माध्यम: 12 सितंबर को सीवान में राष्ट्रीय लोक अदालत
मुकदमे

न्याय का त्वरित माध्यम: 12 सितंबर को सीवान में राष्ट्रीय लोक अदालत

दिल्ली उच्च न्यायालय सहित पांच स्थानों को हिंसक हमले की धमकी
मुकदमे

दिल्ली उच्च न्यायालय सहित पांच स्थानों को हिंसक हमले की धमकी

चेहरे की पहचान को चुनौती देने वाले विरोध प्रदर्शन: भारत का सर्वोच्च न्यायालय सुनेगा मामला
मुकदमे

चेहरे की पहचान को चुनौती देने वाले विरोध प्रदर्शन: भारत का सर्वोच्च न्यायालय सुनेगा मामला

गवर्नर हाउस घेराव के एलान पर हाईकोर्ट का कड़वा जवाब, शांति बनाए रखने का निर्देश
मुकदमे

गवर्नर हाउस घेराव के एलान पर हाईकोर्ट का कड़वा जवाब, शांति बनाए रखने का निर्देश

वार्निंग लेबल लागू करने में देरी को लेकर अदालत ने एफएसएसएआई को फटकारा
मुकदमे

वार्निंग लेबल लागू करने में देरी को लेकर अदालत ने एफएसएसएआई को फटकारा

सुप्रीम कोर्ट ने कोरियन रैना जैसे 5 कॉमेडियन के खिलाफ दर्ज मामले रद्द कर दिए
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने कोरियन रैना जैसे 5 कॉमेडियन के खिलाफ दर्ज मामले रद्द कर दिए

कर विभाग को झटका: ट्रिब्यूनल ने कर विभाग की अपील खारिज कर दी
मुकदमे

कर विभाग को झटका: ट्रिब्यूनल ने कर विभाग की अपील खारिज कर दी

ताज़ा ख़बरें