रायपुर में 17 लाख से अधिक मामले, नेशनल लोक अदालत से त्वरित निपटारा
रायपुर और आसपास के जिलों में शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन हुआ, जहाँ राजीनामा योग्य मामलों का निपटारा उसी स्थान पर किया गया। इस पहल से आम जनता को बार-बार अदालत जाने की परेशानी से मुक्ति मिली और सुलभ एवं सस्ता समाधान उपलब्ध हुआ। 17 लाख से अधिक मामलों में मुख्यतः राजस्व, ट्रैफिक और चेक बाउंस के मामले शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश का शीघ्र निपटारा हो रहा है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
देशभर में नेशनल लोक अदालत का आयोजन, रायपुर जिले में 17 लाख से अधिक मामले, अधिकांश मामलों का होगा निराकरण
राजीनामा योग्य प्रकरण के मामलों का निराकरण नेशनल लोक अदालत, आरंग, राजिम, गरियाबंद, देवभोग और तिल्दा जैसी जगह पर भी आयोजन
By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : September 12, 2026 at 3:40 PM IST
रायपुर: प्रदेश की राजधानी रायपुर सहित पूरे देश में शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है. जिसमें राजीनामा योग्य प्रकरण के मामलों का निराकरण आयोजन स्थल पर ही हो जाता है. जिससे आम जनता को बार-बार कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ते हैं. नेशनल लोक अदालत का आयोजन इसलिए भी किया जाता है कि यह सस्ता और सुलभ होता है.
रायपुर जिले के कई जगहों में आयोजन
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलराम प्रसाद वर्मा ने ईटीवी भारत को बताया कि नेशनल लोक अदालत में सबसे ज्यादा मामले राजीनामा प्रकरण के होते हैं. चाहे वह जिला मुख्यालय हो या फिर तहसील मुख्यालय इन जगहों पर इसका आयोजन होता है. रायपुर मुख्यालय के साथ ही आरंग, राजिम, गरियाबंद, देवभोग और तिल्दा जैसी जगह पर नेशनल लोक अदालत का आयोजन हो रहा है.
रायपुर जिले में ही 17 लाख मामले
नेशनल लोक अदालत में राजस्व क्लेम, सिविल ट्रैफिक, समरी केसेस जैसे सभी तरह के मिलाकर अकेले रायपुर जिले में 17 लाख से ज्यादा मामले हैं. अधिकांश मामलों में राजीनामा होने की संभावना है. मेन मामले ट्रैफिक के हैं जो समरी पेश होते हैं.
चेक बाउंस जैसे मामले भी आते
जिला एवं सत्र न्यायधीश ने बताया कि कोर्ट के जो रेगुलर क्लेम के हैं उसका निराकरण नेशनल लोक अदालत में होता है. इसके साथ ही चेक बाउंस के मामले भी आते हैं और अधिकांश मामलों का त्वरित निराकरण भी किया जाता है. 17 लाख मामलों में अधिकांश मामले राजस्व के हैं.
त्वरित निराकरण वाले मामले
आयोजन स्थल पर त्वरित निराकरण वाले मामलों में एक्सीडेंट से संबंधित क्लेम केसेस इसके साथ ही सिविल केसेस हैं, जो जमीन जायदाद के बंटवारे से संबंधित होते हैं. दाण्डिक प्रकरणों में छोटे-छोटे मामले होते हैं. जिसमें मारपीट, गाली गलौज जैसी चीज शामिल है. इसमें भी नेशनल लोक अदालत में राजीनामा होता है.
कुछ केस ऐसे होते हैं जिसमें लंबा समय लगता है, जिसमें गवाहों की संख्या बहुत ज्यादा होती है. ऐसे मामलों को निराकरण करने में कोर्ट को काफी समय लगता है. इसी वजह से हम लोग नेशनल लोक अदालत को तरजीह देते हैं, क्योंकि कोर्ट में जो राजीनामा योग्य के मामले हैं इस तरह के मामले का निपटारा राष्ट्रीय लोक अदालत में हो सके.
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