ग्वालियर में आज विशेष लोक अदालत: चेक बाउंस के मामलों का निपटारा
ग्वालियर जिले में 18 जुलाई को विशेष लोक अदालत आयोजित होगी, जिसमें 50 हजार रुपये तक के चेक बाउंस के मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया जाएगा। इसका उद्देश्य पक्षकारों को न्यायिक प्रक्रिया से राहत दिलाना है।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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ग्वालियर में 18 जुलाई को विशेष लोक अदालत:चेक बाउंस के 50 हजार रुपए तक के मामलों का किया जाएगा निपटारा
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ग्वालियर जिले में लंबे समय से लंबित चेक बाउंस (धारा-138 परक्राम्य लिखत अधिनियम/एनआई एक्ट) के मामलों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण निराकरण के लिए शनिवार (18 जुलाई 2026 को) विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इसका उद्देश्य आपसी सहमति के आधार पर मामलों का शीघ्र निपटारा कर पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत दिलाना है।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार आयोजित इस विशेष लोक अदालत का संचालन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष ललित किशोर के मार्गदर्शन में होगा। इसमें विशेष रूप से 50 हजार रुपए से कम राशि वाले चेक बाउंस मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि, आपसी सहमति बनने पर अन्य उपयुक्त मामलों का भी निराकरण किया जा सकेगा।
जिला न्यायालय में दो विशेष खंडपीठों का गठन
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि लोक अदालत के सफल संचालन के लिए जिला न्यायालय में दो विशेष खंडपीठों का गठन किया गया है। इसके अलावा तहसील विधिक सेवा समिति मितावली में भी एक अलग खंडपीठ बनाई गई है, ताकि अधिक से अधिक मामलों का त्वरित निपटारा हो सके।
उन्होंने कहा कि चेक बाउंस के मामलों में यदि दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार हों, तो वर्षों तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से बचा जा सकता है। लोक अदालत का उद्देश्य भी विवादों का आपसी सहमति से समाधान कराना है, जिससे पक्षकारों का समय और धन दोनों बचें तथा न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम हो।
राजीनामे के माध्यम से विवाद का समाधान
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने धारा-138 एनआई एक्ट से जुड़े सभी पक्षकारों से 18 जुलाई को आयोजित विशेष लोक अदालत में शामिल होकर आपसी राजीनामे के माध्यम से अपने विवाद का समाधान कराने की अपील की है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार लोक अदालतें विवादों के त्वरित, सरल और कम खर्चीले समाधान का प्रभावी माध्यम हैं। यहां हुए समझौते को न्यायालय की मान्यता प्राप्त होती है और उसके बाद मामले का अंतिम निपटारा हो जाता है। प्राधिकरण को उम्मीद है कि इस विशेष लोक अदालत में बड़ी संख्या में चेक बाउंस के मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान होगा।
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