फर्रुखाबाद में पॉक्सो मुकदमा दर्ज कराने के लिए झूठे सबूत पेश करने वाले दोषी को अदालत ने 2000 रुपये जुर्माना लगाया
फर्रुखाबाद उच्च न्यायालय ने पॉक्सो मुकदमा दर्ज कराने के लिए झूठे सबूत पेश करने और न्यायालय में झूठी गवाही देने के मामले में वादी को दोषी ठहराया है। अदालत ने 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया है, जो यदि जमा नहीं किया जाता है, तो दोषी को 6 महीने के कारावास की सजा होगी।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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झूठा पॉक्सो केस दर्ज कराने वाला दोषी:फर्रुखाबाद अदालत से 2 हजार रुपए जुर्माना; 2019 में दर्ज हुआ था रेप का मुकदमा
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फर्रुखाबाद की अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)-01 मेराज अहमद की अदालत ने झूठा पॉक्सो मुकदमा दर्ज कराने और न्यायालय में झूठी गवाही देने के मामले में वादी को दोषी करार दिया है। अदालत ने कमालगंज थाना क्षेत्र के लोहिया नगर निवासी बदन सिंह पर 2 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। जुर्माना जमा नहीं करने पर उसे छह माह का कारावास भुगतना होगा।
2019 में दर्ज कराया था पॉक्सो और दुष्कर्म का मुकदमा
मामला वर्ष 2019 का है। बदन सिंह ने कमालगंज थाने में रामवीर उर्फ रामू के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो अदालत में हुई।
सुनवाई के दौरान 8 मार्च 2022 को अदालत ने पाया कि वादी ने झूठे तथ्यों के आधार पर मुकदमा दर्ज कराया था और न्यायालय में भी झूठी गवाही दी थी।
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा
मामले का खुलासा होने के बाद विशेष पॉक्सो अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा-22 के तहत बदन सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत के आदेश के अनुपालन में 30 अक्टूबर 2022 को कमालगंज थाने में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
सम्मन और वारंट के बाद हुई गिरफ्तारी
अदालत ने सुनवाई के दौरान बदन सिंह को कई बार सम्मन और वारंट जारी किए, लेकिन वह पेश नहीं हुआ। इसके बाद 22 जुलाई को कमालगंज पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया।
पेशी के दौरान बदन सिंह ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए अदालत से मुकदमे का निस्तारण करने का अनुरोध किया।
लोक अभियोजक ने कठोर सजा की मांग की
विशेष लोक अभियोजक ने अदालत में दलील दी कि बदन सिंह ने झूठा मुकदमा दर्ज कराकर न्यायालय का बहुमूल्य समय नष्ट किया और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है। इसलिए उसे कठोर दंड दिया जाना चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश मेराज अहमद ने बदन सिंह को दोषी ठहराते हुए 2 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में उसे छह माह का कारावास भुगतना होगा।
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