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लखनऊ में पेंशन अदालत का आयोजन, आश्रितों की समस्याओं की निपटती, अधिकारियों ने कड़े निर्देश

लखनऊ में मध्यांचल विद्युत मुख्यालय में पेंशन अदालत का आयोजन किया गया। जिसमें सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके आश्रितों की समस्याओं की सुनवाई की गई। आश्रित उमेश ने बताया कि उनके इलाज का ढाई लाख का मेडिकल बिल था, लेकिन विभाग से केवल 11 हजार रुपये ही पास किए गए। अधिकारियों ने निगम के निदेशक के कड़े निर्देश जारी किए, कि लंबित मामले समयबद्ध और प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किए जाएं।

13 जून 2026 को 06:15 pm बजे
लखनऊ में पेंशन अदालत का आयोजन, आश्रितों की समस्याओं की निपटती, अधिकारियों ने कड़े निर्देश

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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लखनऊ मध्यांचल विद्युत में लगी पेंशन अदालत:आश्रित उमेश बोले- मेडिकल था ₹2.5 लाख का बिल पास हुआ ₹11 हजार का

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लखनऊ में शनिवार को मध्यांचल विद्युत वितरण निगम (मध्यांचल विद्युत) मुख्यालय में पेंशन अदालत का आयोजन किया गया। इसमें सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके आश्रितों की समस्याओं की सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान कई लोगों ने पेंशन, चिकित्सा प्रतिपूर्ति और अन्य

इस दौरान उमेश नामक आश्रित ने बताया कि उनके इलाज का करीब ढाई लाख रुपये का मेडिकल बिल था, लेकिन विभाग की ओर से केवल 11 हजार रुपये ही पास किए गए। उन्होंने अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित भुगतान की मांग की।

अलीगंज निवासी पवन कुमार शुक्ला और राजाजीपुरम की पूनम कश्यप अपनी पारिवारिक पेंशन और चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति (Reimbursement) से जुड़े मामलों को लेकर पेंशन अदालत में पहुंचे। उन्होंने बताया कि लंबे समय से प्रकरण लंबित हैं। जिसके कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जीवन भर विभाग की सेवा करने वाले कर्मचारियों के परिवारों को अपने ही अधिकारों के लिए लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

पेंशन अदालत में अपनी बात रखते समय शिकायतकर्ताओं की पीड़ा और बेबसी साफ दिखाई दी। उनकी व्यथा सुनकर उपस्थित अधिकारियों ने भी गंभीरता से मामले को लिया। आश्रितों की आंखों में छलकते दर्द और समस्याओं की गंभीरता को देखते हुए निगम के निदेशक (कार्मिक, प्रशासन एवं प्रबंधन) ने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए।

पवन कुमार ने कहा कि पेंशन, चिकित्सा प्रतिपूर्ति तथा अन्य लंबित मामलों का समयबद्ध और प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए। निदेशक आर.पी. सिंह ने कहा कि किसी भी पात्र कर्मचारी या आश्रित को अपने अधिकारों के लिए अनावश्यक रूप से भटकना न पड़े। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ मामलों का समाधान करने और शिकायतकर्ताओं को राहत प्रदान करने के निर्देश दिए।

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