बृजभूषण शरण सिंह मामले में अदालत ने क्यों माना आरोप झूठे?
दिल्ली पुलिस की कहानी मुख्य रूप से एक महिला पहलवान की गवाही पर टिकी थी, लेकिन अदालत ने उनके बयान में कई विरोधाभास पाए। अदालत ने माना कि आरोप पहले से तैयार और राजनीति से प्रेरित थे। गवाहों के बयानों में बदलाव और घटनाओं के बाद सामान्य संबंध बनाए रखने पर भी सवाल उठाए गए।

सौजन्य से:- Navbharat Times
दिल्ली पुलिस की कहानी मुख्य रूप से अपने गवाह नंबर 5 (महिला पहलवान) की गवाही पर टिकी थी। हालांकि, अदालत ने उनके बयान में कई अहम विरोधाभास पाए। एक कथित घटना को लेकर गवाह ने एक जगह 2016 में मंगोलिया में उत्पीड़न होने की बात कही, जबकि पहले दिए गए बयान में 2015 में तुर्की का जिक्र था। WFI दफ्तर में कथित घटना को लेकर भी टाइमलाइन बदली हुई मिली। पहले रविवार बताया गया, जबकि बाद में इसे सोमवार कर दिया गया। अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि WFI दफ्तर रविवार को बंद रहता था। रविवार को जजमेंट का सारांश NBT को मिला। इस मामले में अभियोजन का प्रतिनिधित्व एडिशनल पीपी मनीष रावत और बचाव पक्ष के लिए सीनियर काउंसिल राजीव मोहन ने किया था।
बाद में आया एशियाई खेलों का आरोप
अदालत ने पाया कि एशियाई खेलों से जुड़े गंभीर आरोप शुरुआती शिकायतों और बयानों में मौजूद नहीं थे। ये आरोप बाद में 'महत्वपूर्ण सुधार' के तौर पर सामने आए। अदालत ने माना कि ऐसे बदलाव गवाही की विश्वसनीयता पर असर डालते हैं। मामले में तब नया मोड़ आया, जब गवाह नंबर 7 और 8 अपनी गवाही में अपनी पहले की शिकायतों से मुकर गए। दोनों ने अदालत में कहा कि उनका यौन उत्पीड़न नहीं हुआ था। उनका दावा था कि गवाह नंबर 5 और कुछ कोचों ने बृजभूषण को झूठे मामले में फंसाने के लिए दबाव बनाया। अंग्रेजी में तैयार शिकायतों को याद करने और फिर उनपर साइन करने के लिए मजबूर किया गया।
घटना के बाद भी संबंध सामान्य रहने पर सवाल
अदालत ने कथित घटनाओं के बाद शिकायतकर्ताओं के व्यवहार को भी साक्ष्यों के साथ परखा। रिकॉर्ड में बृजभूषण के साथ सामान्य संबंध बनाए रखने और कथित घटनाओं के बाद उनके घर जाकर आशीर्वाद लेने जैसी बातें सामने आईं। भीड़भाड़ वाले स्टेडियमों में कथित घटनाओं के बावजूद वहां मौजूद कोचों, परिजनों या पुलिसकर्मियों की ओर से तत्काल शिकायत नहीं किए जाने को भी अदालत ने अभियोजन की कहानी के संदर्भ में देखा। आखिरकार, अदालत इस नतीजे पर पहुंची कि आरोप पहले से तैयार, जान-बूझकर लगाए गए और राजनीति से प्रेरित मिले।
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