जमानत के लिए फर्जी दस्तावेज, अदालत ने आरोपी को जेल भेजा
फरीदाबाद न्यूज: अदालत ने आरोपी विकी उर्फ विकास की जमानत रद्द कर उसे जेल भेज दिया क्योंकि उसने जमानत के लिए फर्जी दस्तावेज लगाए थे। पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Faridabad News: जमानत के लिए दो लोगों के लगाए फर्जी दस्तावेज, अदालत ने आरोपी की जमानत रद्द कर जेल भेजा
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पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में दर्ज की प्राथमिकी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जमानत के लिए दो लोगों की पहचान और दस्तावेज का फर्जी तरीके से इस्तेमाल करने का मामला सामने आने पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने आरोपी विकी उर्फ विकास की जमानत रद्द कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अदालत ने फर्जी जमानत देने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति केंद्रीय थाना पुलिस को भेजी।
इसके आधार पर पुलिस ने सात अगस्त को धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। मामला सेक्टर-सात थाने में 11 फरवरी 2018 को दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। आरोपी विकी को 26 मई 2022 को जमानत मिली थी। इसके बाद 17 जून 2022 को उसकी जमानत के लिए दो जमानती पेश किए गए। हाल में राहुल शर्मा ने अदालत में पेश होकर बताया कि उसने आरोपी की जमानत नहीं दी थी। उसके आधार कार्ड की जगह किसी अन्य व्यक्ति ने उसके नाम का फर्जी आधार कार्ड लगाया था। जमानत के दस्तावेज में कार का पंजीकरण प्रमाणपत्र भी लगाया गया, जो उसका नहीं था।
इसी तरह सुनील जैन ने भी अदालत को बताया कि उसकी जानकारी के बिना उसके नाम और वाहन के दस्तावेज का इस्तेमाल जमानत में किया गया। अदालत ने दोनों के बयान और दस्तावेज देखने के बाद पाया कि किसी अन्य व्यक्ति ने उनकी पहचान बनाकर फर्जी जमानत दी थी। अदालत ने कहा कि विकी को जेल से बाहर आने के बाद फर्जी जमानत के बारे में जानकारी हो गई थी। इसके बावजूद उसने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। अदालत ने उसकी जमानत रद्द कर दी और उसे हिरासत में भेज दिया। पुलिस ने आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जमानत के लिए दो लोगों की पहचान और दस्तावेज का फर्जी तरीके से इस्तेमाल करने का मामला सामने आने पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने आरोपी विकी उर्फ विकास की जमानत रद्द कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अदालत ने फर्जी जमानत देने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति केंद्रीय थाना पुलिस को भेजी।
इसके आधार पर पुलिस ने सात अगस्त को धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। मामला सेक्टर-सात थाने में 11 फरवरी 2018 को दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। आरोपी विकी को 26 मई 2022 को जमानत मिली थी। इसके बाद 17 जून 2022 को उसकी जमानत के लिए दो जमानती पेश किए गए। हाल में राहुल शर्मा ने अदालत में पेश होकर बताया कि उसने आरोपी की जमानत नहीं दी थी। उसके आधार कार्ड की जगह किसी अन्य व्यक्ति ने उसके नाम का फर्जी आधार कार्ड लगाया था। जमानत के दस्तावेज में कार का पंजीकरण प्रमाणपत्र भी लगाया गया, जो उसका नहीं था।
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इसी तरह सुनील जैन ने भी अदालत को बताया कि उसकी जानकारी के बिना उसके नाम और वाहन के दस्तावेज का इस्तेमाल जमानत में किया गया। अदालत ने दोनों के बयान और दस्तावेज देखने के बाद पाया कि किसी अन्य व्यक्ति ने उनकी पहचान बनाकर फर्जी जमानत दी थी। अदालत ने कहा कि विकी को जेल से बाहर आने के बाद फर्जी जमानत के बारे में जानकारी हो गई थी। इसके बावजूद उसने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। अदालत ने उसकी जमानत रद्द कर दी और उसे हिरासत में भेज दिया। पुलिस ने आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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