होम›मुकदमे›वयस्क अपराध के मामले में नाबालिग पर मुकदमा चलाने से पहले बाल न्यायालय को तर्कसंगत आदेश पारित करना अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मुकदमे

वयस्क अपराध के मामले में नाबालिग पर मुकदमा चलाने से पहले बाल न्यायालय को तर्कसंगत आदेश पारित करना अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट का फैसला

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि बाल न्यायालय को किसी नाबालिग पर वयस्क के रूप में मुकदमा चलाने से पहले तर्कसंगत आदेश पारित करना आवश्यक है। यह निर्णय बाल न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2000 की धारा 19 के अनुरूप है। इस फैसले से नाबालिगों के अधिकारों की सुरक्षा होगी।

13 जुलाई 2026 को 03:13 pm बजे
वयस्क अपराध के मामले में नाबालिग पर मुकदमा चलाने से पहले बाल न्यायालय को तर्कसंगत आदेश पारित करना अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सौजन्य से:- Live Law

एस. 19 जेजे एक्ट | बाल न्यायालय को बच्चे पर वयस्क के रूप में मुकदमा चलाने से पहले तर्कसंगत आदेश पारित करना होगा: सुप्रीम कोर्ट

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
ECI के दावे पर संदेह: क्या सुप्रीम कोर्ट ने नया फॉर्म‑6 घोषणा मंज़ूर किया?
मुकदमे

ECI के दावे पर संदेह: क्या सुप्रीम कोर्ट ने नया फॉर्म‑6 घोषणा मंज़ूर किया?

बबेरू के दूकानदारों को सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश, विवाद में मिली राहत
मुकदमे

बबेरू के दूकानदारों को सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश, विवाद में मिली राहत

तेलंगाना हाईकोर्ट ने SRSP विस्थापित महिला को कृषि भूमि न मिलने पर सरकार को किया कड़ा सवाल
मुकदमे

तेलंगाना हाईकोर्ट ने SRSP विस्थापित महिला को कृषि भूमि न मिलने पर सरकार को किया कड़ा सवाल

फु क्वोक में छात्र मॉक ट्रायल से कानूनी ज्ञान और सामाजिक कौशल हासिल करते हैं
मुकदमे

फु क्वोक में छात्र मॉक ट्रायल से कानूनी ज्ञान और सामाजिक कौशल हासिल करते हैं

हाईकोर्ट ने किठौर मामले में आरोपी की जमानत अस्वीकृत, गवाहों पर दबाव की सम्भावना को प्राथमिकता दी
मुकदमे

हाईकोर्ट ने किठौर मामले में आरोपी की जमानत अस्वीकृत, गवाहों पर दबाव की सम्भावना को प्राथमिकता दी

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में 16,726 अवैध निर्माणों को सील‑ध्वस्त करने का आदेश दिया
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में 16,726 अवैध निर्माणों को सील‑ध्वस्त करने का आदेश दिया

हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को चेतावनी: इलाज में देरी नहीं, २५,००० रुपये जुर्माना
मुकदमे

हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को चेतावनी: इलाज में देरी नहीं, २५,००० रुपये जुर्माना

MP उच्च न्यायालय में याचिकाओं से टैक्‍स ऑडिट डेडलाइन पर बढ़े प्रश्न
मुकदमे

MP उच्च न्यायालय में याचिकाओं से टैक्‍स ऑडिट डेडलाइन पर बढ़े प्रश्न

ताज़ा ख़बरें