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बेंगलुरु के अदालत ने आरएसएस पर सांप्रदायिक टिप्पणियों के आरोप में प्रियंक खरगे और हारिस नलपाड को दिलाई है अदालत की चुनौती

अदालत ने तेजस ए की शिकायत के आधार पर एक आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। प्रियंक खरगे और मोहम्मद हारिस नलपाड को 21 जुलाई को अदालत में पेश होने के लिए समन जारी किया गया है। अदालत ने दूसरे आरोपी दिनेश गुंडू राव के खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी है।

27 जून 2026 को 07:23 pm बजे
बेंगलुरु के अदालत ने आरएसएस पर सांप्रदायिक टिप्पणियों के आरोप में प्रियंक खरगे और हारिस नलपाड को दिलाई है अदालत की चुनौती

सौजन्य से:- Lokmat News Hindi

21 जुलाई को अदालत में पेश हो?, संघ पर 'अपमानजनक टिप्पणी', प्रियंक खरगे और मोहम्मद हारिस नलपाड पर समन

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: June 27, 2026 21:51 IST2026-06-27T21:49:55+5:302026-06-27T21:51:06+5:30

भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 (आपराधिक मानहानि) के तहत आरोपी संख्या 1 और 3 के विरुद्ध अपराध का संज्ञान लिया जाता है।

बेंगलुरु: बेंगलुरु की एक अदालत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संबंध में कांग्रेस नेताओं प्रियंक खरगे और मोहम्मद हारिस नलपाड की कथित मानहानिकारक टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ दायर एक शिकायत का शनिवार को संज्ञान लिया और दोनों को 21 जुलाई को अदालत में पेश होने के लिए समन जारी किया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने नवंबर 2025 में बेंगलुरु निवासी और आरएसएस सदस्य तेजस ए. द्वारा दायर शिकायत के आधार पर एक आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया।

इस मामले में प्रियंक खरगे को आरोपी संख्या एक और मोहम्मद हारिस नलपाड को आरोपी संख्या तीन बनाया गया है। हालांकि, अदालत ने दूसरे आरोपी पूर्व मंत्री दिनेश गुंडू राव के खिलाफ कार्यवाही खत्म कर दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा, "भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 (आपराधिक मानहानि) के तहत आरोपी संख्या 1 और 3 के विरुद्ध अपराध का संज्ञान लिया जाता है।

आरोपी संख्या दो के विरुद्ध कार्यवाही समाप्त की जाती है। कार्यालय को निर्देश दिया जाता है कि इस मामले को रजिस्टर नंबर तीन में आपराधिक मामले (सी.सी.) के रूप में दर्ज किया जाए तथा आरोपी संख्या 1 और 3 को समन जारी किया जाए, जिसका जवाब 21 जुलाई 2026 तक आना चाहिए।"

शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रियंक खरगे ने पिछले वर्ष अक्टूबर में तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को एक पत्र लिखकर सरकारी परिसरों (जिनमें स्कूल और खेल के मैदान भी शामिल हैं) में आरएसएस की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया था। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इसके बाद मंत्री ने सोशल मीडिया पर आरएसएस के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां पोस्ट कीं।

दिनेश गुंडू राव (जो उस समय मंत्री थे) पर भी सोशल मीडिया और टेलीविन मीडिया के साथ बातचीत में इसी तरह की टिप्पणी करने का आरोप लगा था। वहीं, मोहम्मद हारिस नलपाड पर आरोप है कि उन्होंने एक सोशल मीडिया चैनल पर आरएसएस और उसके सदस्यों के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।

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