22 साल बाद सांभर शिकार मामले में, अदालत सुनाया फैसला, 4 दोषियों को 3-3 साल की सजा
सहारनपुर के एक अदालत ने 22 साल पुराने सांभर शिकार मामले के चार आरोपियों को दोषी ठहराया और उन्हें मिलाकर तीन-तीन साल की कैद और 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

सौजन्य से:- Jagran
सांभर का शिकार मामले में 22 साल बाद सहारनपुर अदालत ने सुनाया फैसला, 4 दोषियों को 3-3 साल की सजा
सहारनपुर की अदालत ने 22 साल पुराने सांभर शिकार मामले में चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। ...और पढ़ें
HighLights
- सहारनपुर में 22 साल पुराने सांभर शिकार मामले में फैसला।
- चार आरोपियों को तीन साल कैद, 10 हजार रुपये जुर्माना।
- बिजनौर में मां को बेटे की हत्या में आजीवन कारावास।
संवाद सहयोगी, सहारनपुर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मीनाक्षी सिन्हा की अदालत ने 22 साल पुराने वन्य जीव अधिनियम के एक मामले में सांभर का शिकार करने वाले चार आरोपितों को दोषी करार दिया है। इस मामले के दो आरोपित मुकदमे के विचारण के दौरान मर चुके हैं।
अभियोजन अधिकारी विकास कुशवाहा ने बताया कि मामले की शिकायत 23 जनवरी 2004 को वन दारोगा वीके श्रीवास्तव ने थाना बिहारीगढ़ में दर्ज कराई थी। आरोप था कि खुशहालीपुर के रहने वाले छह लोग लोगों ने जंगल में जाकर सांभर का शिकार किया और फिर उसे मार कर खाने की तैयारी कर रहे थे।
वन विभाग की ओर से दबिश देने पर एक आरोपित सहीपाल पकड़ा गया। जबकि पांच अन्य अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। पूछे जाने पर आरोपित सहीपाल ने शेष आरोपित का नाम बाबू,राजेश,पवन,रघुवीर और करतार बताया। इस मामले में पुलिस ने सभी छह आरोपितों के खिलाफ वन्य अधिनियम की धारा 51 के अंतर्गत आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया।
22 साल तक चले इस मुकदमे में करीब 19 साल बाद गवाही प्रारंभ हो सकी। पत्रावली पर आए साक्ष्य और दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने सहीपाल, बाबू,राजेश और पवन को दोषी करार दिया और सजा सुनाई। इस मामले के दो आरोपित रघुवीर और करतार की मृत्यु हो जाने के कारण दोनों के खिलाफ मामला समाप्त कर दिया गया।
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19 साल बाद आए तीन गवाह
वन्य जीव अधिनियम के इस मामले में 28 जुलाई 2005 को आरोप तय हो जाने के करीब 19 साल बाद मामले में वन विभाग की ओर से तीन गवाह पेश किए गए। दो वनरक्षक राम प्रसाद शर्मा और राजेंद्र कंडवाल तथा एक गवाह लेखराज पेश हुआ। उनकी गवाही पर अदालत ने आरोपितों को तीन-तीन साल कैद और 10-10 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में सभी को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
चार साल के बेटे की फावड़े से काटकर हत्या करने वाली मां को आजीवन कारावास
दूसरी ओर बिजनौर में पॉक्सो एक्ट के विशेष अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश लोकेश नागर ने चार वर्षीय बेटे की फावड़े से काटकर हत्या और उसका शव जलाने के प्रयास के मामले में आरोपित मां आदेश देवी को दोषी ठहराया है। न्यायाधीश ने आदेश को आजीवन कारावास और 60 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने जुर्माने की राशि में से 40 हजार रुपये मृतक के पिता को देने का आदेश दिया है।
एडीजीसी मुकेश कुमार चौहान के अनुसार हीमपुरदीपा क्षेत्र के गांव जलालपुर हसना निवासी कपिल कुमार ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 12 जून 2024 को वह अपने खेत पर गया था। घर पर उसकी पत्नी आदेश और चार वर्षीय बेटा हर्ष मौजूद थे। जब वह खेत से घर आया तो देखा कि उसकी पत्नी आदेश ने हर्ष की फावड़े से काटकर हत्या कर दी है।
हत्या करने के बाद उसे लकड़ियों में आग लगाकर जलाने का प्रयास कर रही है। कपिल के भाई सुनील, तहेरे भाई कविंद्र की मौजूदगी में आदेश से पूछा कि उसने बेटे हर्ष को क्यों मारा तो महिला फावड़ा लेकर अपने पति के पीछे भी दौड़ी। इसी बीच कपिल अपने बेटे हर्ष के शव को जलती लकड़ियों से उठाकर ले भागा।
आरोपित महिला के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की गई। आदेश के मायके वालों ने उसे मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया था। न्यायाधीश लोकेश नागर ने आदेश देवी को बेटे हर्ष की हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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