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सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका, जमानत रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करते हुए 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि मामले का ट्रायल 6 महीने में पूरा होना चाहिए. सोनम रघुवंशी पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप है.

23 जुलाई 2026 को 08:13 am बजे
सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका, जमानत रद्द

सौजन्य से:- ndtv.in

- सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है

- सुप्रीम कोर्ट ने सोनम की जमानत रद्द कर उसे 3 हफ्ते में सरेंडर का आदेश दिया है

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले का ट्रायल 6 महीने में पूरा होना चाहिए

इंदौर के राजा रघुवंशी मर्डर मामले में पत्नी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने उसकी जमानत रद्द करते हुए 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया. दरअसल इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हुई हत्या के मामले मे आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार ने याचिका दाखिल की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले का ट्रायल 6 महीने में पूरा हो. अगर 6 महीने में ट्रायल पूरा नहीं होता है तो सोनम फिर से बेल याचिका दाखिल कर सकती है. इसके साथ ही कोर्ट ने उसे तीन हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया है.

हाई कोर्ट ने सोनम की जमानत को रखा था बरकारर

बता दें कि मेघालय हाईकोर्ट ने 30 जून को राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत को बरकरार रखते हुए मेघालय सरकार की चुनौती को खारिज कर दिया था. हाईकोर्ट ने माना था कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में खामियां थीं. इस फैसले के खिलाफ मेघालय सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी.

कोर्ट ने सोनम के वकील को दिए थे दो विकल्प

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सोनम के वकील को दो विकल्प देते हुए पूछा था कि क्या सोनम रघुवंशी सरेंडर करेगी या कोर्ट उसकी जमानत रद्द करने पर फैसला दे. जबकि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में आरोपी सोनम रघुवंशी ने खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है. उसके खिलाफ अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है. ऐसे में केवल आरोपों के आधार पर उसे दोषी नहीं माना जा सकता है.

SG तुषार मेहता ने कहा- फरार हो सकती है सोनम

जबकि मेघालय सरकार की ओर से पेश हुए SG तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि दस्तावेज में केवल एक कानूनी धारा का नंबर टाइप करने में गलती हुई थी. इतनी छोटी तकनीकी गलती के आधार पर जमानत नहीं मिलनी चाहिए. तुषार मेहता ने ये भी कहा कि जमानत बरकरार रहने की सूरत में सोनम के फरार होने की आशंका है.

अदालत में मेघालय सरकार की दलील

मेघालय सरकार की तरफ से पेश SG तुषार मेहता ने दलील दी कि प्रतिवादी की शादी एक शख्स से हुई थी. शादी के तुरंत बाद वे हनीमून के लिए मेघालय गए. उसने अपने पति को पहाड़ियों में एक सुनसान जगह पर ले जाने के लिए बहलाया. इस दौरान उसके प्रेमी द्वारा हायर तीन लोग भी उसका पीछा कर रहे थे. आखिरकार पति की हत्या कर दी गई, इसमें पत्नी भी शामिल थी. शव को खाई में फेंक दिया. उसकी मौत खाई में फेंके जाने से नहीं हुई थी. पहले उसकी हत्या की गई और फिर उसे फेंका गया, जांच से यही पता चलता है. फिर रेस्पॉन्डेंट भाग गई.

धारा 103 के बजाय धारा 403 का जिक्र हुआ

जाचं में पता चला कि जिन तीन लोगों ने सोनम की मदद की थी, वे एक खास जगह पर थे. इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. अब रिकॉर्ड में यह बात सामने आई है कि प्रेमी ने सोनम को सलाह दी थी कि अब उसके लिए सरेंडर करना ज़्यादा सुरक्षित होगा. तब वह गाजीपुर में थी. उसने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि कृपया गिरफ्तारी का मेमो देखें. उसने अपने भाई का नाम उस व्यक्ति के तौर पर बताया जिससे संपर्क हो सके. टाइपिंग की गलती देखें. हत्या के अपराध के बारे में जानने और सरेंडर करने वाले शख्स के मामले में, धारा 103 के बजाय धारा 403 का जिक्र किया गया था.

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