होमअपराधसुप्रीम कोर्ट ने अवैध इमारतों को लेकर सख्त संदेश दिया, 4 अगस्त तक कार्रवाई नहीं तो शीर्ष अधिकारियों की खैर नहीं
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने अवैध इमारतों को लेकर सख्त संदेश दिया, 4 अगस्त तक कार्रवाई नहीं तो शीर्ष अधिकारियों की खैर नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में गैर-कानूनी और असुरक्षित इमारतों और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े एक मामले में नगर निगम अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने इन अधिकारियों से इमारतों को गिराने या खाली कराने की की गई कार्रवाई की स्टेट्स रिपोर्ट मांगी है, जिनसे आपदा का खतरा हो सकता है।

9 जुलाई 2026 को 01:58 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध इमारतों को लेकर सख्त संदेश दिया, 4 अगस्त तक कार्रवाई नहीं तो शीर्ष अधिकारियों की खैर नहीं

सौजन्य से:- Jansatta

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में गैर-कानूनी और असुरक्षित इमारतों और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली, गुरुग्राम, लखनऊ, पटना और तमिलनाडु के नगर निगम अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इन अधिकारियों से उन जर्जर इमारतों को गिराने या खाली कराने के लिए की गई कार्रवाई की स्टेट्स रिपोर्ट मांगी है, जिनसे आपदा का खतरा हो सकता है।

हाल ही में साकेत और मालवीय नगर में इमारत गिरने की घटना व लखनऊ के अलीगंज में आग लगने की घटनाओं का संज्ञान लेते हुए जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कोर्ट के 20 मई के निर्देशों के पालन में की गई कार्रवाई की जानकारी बेंच के सामने रखें।

कोर्ट ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे 4 अगस्त को सुनवाई की अगली तारीख पर कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हों।

जमीनी सर्वे के लिए स्पेशल टीम बनाने का दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने साकेत, मालवीय नगर और लाजपत नगर का तय समय-सीमा के अंदर जमीनी सर्वे करने के लिए आईआईटी दिल्ली के दो सीनियर प्रोफेसर और दो ड्राफ्ट्समैन वाली एक स्पेशल टीम (कमेटी) बनाने को कहा। इस टीम के साथ दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अधिकारी भी होंगे। इसी तरह का सर्वे सरोजिनी नगर में भी किया जाएगा, जो नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) के अधिकारी क्षेत्र में आता है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस काम में कोई लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए और कमेटी को एक सच्ची रिपोर्ट सौंपनी चाहिए। बेंच ने कहा, “हम यह साफ करते हैं कि कमेटी की ओर से सच्ची रिपोर्ट देने में कोई लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। अगर हमें इस पर शक हुआ तो रिपोर्ट की सच्चाई जानने के लिए इस कोर्ट से एक स्पेशल टीम भेजी जा सकती है।”

कमिश्नर, सीईओ और दूसरे जिम्मेदार अधिकारी पर होगा एक्शन

कोर्ट ने यह चेतावनी देते हुए कहा कि अगर नगर निगम और विकास प्राधिकरण के कमिश्नर, सीईओ और दूसरे जिम्मेदार अधिकारी अगली तारीख तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट रिकार्ड पर नहीं रखते या कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करते तो, उनके खिलाफ (Suo Motu) संज्ञान लेते हुए अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “यह कोर्ट सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों यानी ऐसी नगर पालिकाओं या संबंधित विकास प्राधिकरण के कमिश्नर या CEO के खिलाफ ‘सुओ मोटो’ अवमानना की कार्रवाई शुरू कर सकता है।”

संबंधित अथॉरिटी की जिम्मेदारी तय की जाएगी- सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने आगे चेतावनी दी कि यदि अगली तारीख पर यह पाया गया कि पहले दिए गए निर्देशों और तोड़फोड़ के आदेशों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई है, तो संबंधित अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी प्रमुखों की सीधी जिम्मेदारी तय की जाएगी।

कोर्ट ने कहा, “हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि अगर अगली तारीख पर हमें पता चला कि कोई कार्रवाई नहीं की गई है तो सीधे तौर पर हम उस अथॉरिटी के सीईओ की जिम्मेदारी तय की जाएगी।”

बेंच ने एमिकस (कोर्ट की ओर से नियुक्त वकील) की इस बात से सहमति जताई कि अथॉरिटीज अपनी साख बचाने वाला रवैया अपना रही हैं, वे इमारत गिरने या आग लगने की घटनाओं के बाद सिर्फ बिल्डरों को गिरफ्तार करती हैं, लेकिन अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई न करने के लिए जिम्मेदार अपने ही अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं करती। इसलिए कोर्ट ने अथॉरिटीज को निर्देश दिया कि वे अपनी रिपोर्ट में ऐसी नाकामियों के लिए जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों के नाम बताएं।

20 मई को क्या दिया था आदेश?

अपने 20 मई के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने अथॉरिटीज को निर्देश दिया था कि वे सर्वे के दौरान पहचाने गए अवैध और अनाधिकृत निर्माणों के खिलाफ तुरंत और असरदार कदम उठाएं, जिनमें सीलिंग और तोड़फोड़ शामिल है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि संबंधित अथॉरिटीज के प्रमुख व्यक्तिगत रूप से शपथ-पत्र देकर बताएं कि असल में क्या कार्रवाई की गई है।

यह भी पढ़ें: जोसेफ विजय के दौरों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी DMK, अदालत ने लगाई फटकार, पूछा- मुख्यमंत्री के दौरे को कैसे नियंत्रित कर सकते है

सुप्रीम कोर्ट ने करूर भगदड़ पीड़ितों के परिवारों से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की मुलाकात पर सवाल उठाने के लिए डीएमके को फटकार लगाई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई
अपराध

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई
अपराध

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर
अपराध

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026
अपराध

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका
अपराध

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
अपराध

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश
अपराध

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश

निरीक्षण, मूल्यांकन और शिकायतें: केंद्र ने ट्रिब्यूनलों के लिए नए आयोग का प्रस्ताव रखा
अपराध

निरीक्षण, मूल्यांकन और शिकायतें: केंद्र ने ट्रिब्यूनलों के लिए नए आयोग का प्रस्ताव रखा

ताज़ा ख़बरें