नोएडा DM मेधा रूपम ने 5 लाख मुआवजा आदेश को सुप्रीम कोर्ट में उलटा
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये का मुआवजा दे कर उसे जिलाधिकारी की व्यक्तिगत सैलरी से वसूलने का निर्देश दिया था। मेधा रूपम ने इस निर्देश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जहाँ अधिकारी की वेतन से मुआवजा वसूली की कानूनीता पर विचार होगा। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हुई हिरासत के गैर‑कानूनी होने से उत्पन्न विवाद को दर्शाता है।

सौजन्य से:- ABP News
5 लाख जुर्माने के खिलाफ SC पहुंचीं नोएडा DM मेधा रूपम, HC ने लगाई थी फटकार
गौतम बुद्ध नगर की DM मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये मुआवजा देने और रकम व्यक्तिगत सैलरी से वसूलने का निर्देश दिया था.
गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और यह रकम जिलाधिकारी की व्यक्तिगत सैलरी से वसूली जाए. मेधा रूपम ने अपनी याचिका में हाई कोर्ट के इस निर्देश को चुनौती दी है. मामला आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत हुई हिरासत से जुड़ा है. अदालत में इस हिरासत को गैर-कानूनी पाया गया था.
आकृति चौधरी दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा हैं. उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था. बाद में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उनकी हिरासत को कानून के मुताबिक नहीं माना गया. इसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उन्हें मुआवजा देने का आदेश दिया. हाई कोर्ट ने मुआवजे की रकम 5 लाख रुपये तय करते हुए इसे मेधा रूपम की व्यक्तिगत सैलरी से वसूलने का निर्देश दिया था. इसी हिस्से को लेकर जिलाधिकारी ने अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
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व्यक्तिगत सैलरी से वसूली का मामला
मेधा रूपम की याचिका का मुख्य मुद्दा हाई कोर्ट द्वारा व्यक्तिगत वेतन से मुआवजे की रकम वसूलने का निर्देश है. अब सुप्रीम कोर्ट इस चुनौती पर सुनवाई के दौरान यह देखेगा कि ऐसे मामले में अधिकारी की व्यक्तिगत आर्थिक जिम्मेदारी तय करने का हाई कोर्ट का फैसला कानूनी रूप से उचित था या नहीं. मामले में सुप्रीम कोर्ट के रुख से यह भी स्पष्ट हो सकता है कि किसी प्रशासनिक अधिकारी के फैसले के कारण नागरिक के मौलिक अधिकार प्रभावित होने पर मुआवजे की जिम्मेदारी किस तरह तय की जानी चाहिए.
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