सुप्रीम कोर्ट के जज ने पुलिस के लाठीचार्ज पर की कड़ी फटकार, निष्पक्षता की अपील
जस्टिस उज्जल भुइयां ने जंतर‑मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज को निराशाजनक कहा और पुलिस से बिना अत्यधिक बल के व्यवस्था बनाये रखने को कहा। उन्होंने बताया कि न्यायालय उन लोगों को मुआवजा देगा जिनके मानवाधिकार का उल्लंघन हुआ और पुलिस को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखनी चाहिए। इस बीच, सीजेआई सूर्यकांत ने भी छात्रों के विरोध करने के अधिकार की पुष्टि की।

सौजन्य से:- Hindustan
छात्रों पर लाठीचार्ज एकदम गलत, सुप्रीम कोर्ट के जज ने पुलिस को दी नसीहत
जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर जस्टिस उज्जल भुइयां ने दुख जताया और पुलिस को नसीहत भी दी। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम निष्पक्ष रहना है। लेकिन यह गुण ही गायब होता जा रहा है।
कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर जुटे युवाओं पर पुलिस के ऐक्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज ने दुख जताया है। जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा कि पुलिस का लाठीचार्ज बहुत ही परेशान करने वाली घटना थी। उन्होंने कहा कि अगर छात्र अपना अलग विचार रखते हैं तो उनके खिलाफ दंडात्मक रवैया नहीं अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, प्रदर्शन कर रहे लोगों पर इस तरह से अत्याचार करना बहुत ही निराशाजनक है। जस्टिस भुयान ने कहा, पुलिस अधिकारियों से जिस निष्पक्षता की उम्मीद की जती है वह पूरी तरह से गायब नजर आ रही है जो कि गंभीर चिंता का विषय है।
लोगों का भरोसा बनाए रखे पुलिस- जस्टिस भुयान
उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है कि जिन पीड़ितों के मानवाधिकार का उल्लंघन किया गया है उन्हें उसका मुआवजा दिया जाना चाहिए। जस्टिस भुयान ने कहा कि पुलिस को चाहिए कि बिना ज्यादा बल प्रयोग किए कानून व्यवस्था बनाए रखे। उन्होंने कहा, आम लोगों के लिए एक वर्दीधारी पुलिस वाले की पहचान सरकार से प्राप्त ताकत और अधिकारों के रूप में होती है। अगर किसी को कोई परेशानी होती है तो वह पुलिस से मदद मांगता है। ऐसे में बहुत जरूरी है कि पुलिस विश्वसनीयता बनाए रखे जिससे लोग उसपर भरोसा कर सकें।
उन्होंने बताया कि जब सरकार के अधिकारी ही कानून तोड़ने वाले बन जाते हैं, तो इससे अराजकता को बढ़ावा मिल सकता है। अगर सरकार के अधिकारी ही कानून तोड़ने लगें, तो इससे कानून के प्रति अनादर पैदा होगा और अराजकता को बढ़ावा मिलेगा। कोई भी सभ्य देश ऐसा नहीं होने दे सकता।
स्टिस भुइयां पूर्व सचिव (सुरक्षा) यशोवर्धन आजाद की लिखी पुस्तक विमोचन समारोह में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम राजधानी के वायसराय हॉल में आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि जब हम इंडियन पुलिस सर्विस के युवा अधिकारियों को खुद जाकर प्रदर्शनकारियों और प्रदर्शन करने वालों के साथ मारपीट करते देखते हैं, तो हम सभी को निराशा होती है।
आपको बता दें कि छात्रों के विचारों को लेकर सीजेआई सूर्यकांत ने भी खुलकर कहा था कि उन्हें किसी भी बात का विरोध करने का पूरा अधिकार है। जब बीसीआई ने हैदराबाद के लॉ इंस्टिट्यूट के छात्रों के रजिस्ट्रेशन को बैन करने की बात कही तो सीजेआई ने फटकार लगाते हुए कहा कि छात्रों और उनके बीच किसी को नहीं आना चाहिए।
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