पेंशन भुगतान में देरी पर एसीएस ने डीआईओएस को कड़ा आदेश, अदालत के आदेशों की अमलदारी सुनिश्चित करने का निर्देश
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कोर्ट के आदेशों के बावजूद पेंशन व अन्य देयकों के भुगतान में लम्बे समय तक रुकावट पर असंतोष जताया और जिला विद्यालय निरीक्षकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने शिक्षा निदेशालय को भी निर्देशित किया कि ऐसे मामलों की लंबित स्थिति न हो और अनुपालन न करने पर कार्यवाही की जाए।

सौजन्य से:- Jagran
अदालत के आदेशों के बाद पेंशन भुगतान में देरी पर ACS ने नाराजगी जताई, DIOS को सख्त निर्देश
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कोर्ट के आदेशों के बावजूद पेंशन व अन्य देयकों के भुगतान में ...और पढ़ें
HighLights
- अपर मुख्य सचिव ने समीक्षा बैठक एवं शिक्षा निदेशालय के निरीक्षण में दिए निर्देश
- ऐसे प्रकरण शिक्षा निदेशालय भेजने पर संबंधित डीआइओएस की तय होगी जवाबदेही
राज्य ब्यूरो, जागरण, प्रयागराज। जिन प्रकरणों में न्यायालय ने अवशेष देयकों के भुगतान के आदेश दिए हैं, उन्हें अधिक समय तक जिला स्तर पर लटकाने और उसके बाद उसे शिक्षा निदेशालय भेजने पर अपर मुख्य सचिव (एसीएस) बेसिक/माध्यमिक शिक्षा विभाग पार्थ सारथी सेन शर्मा ने नाराजगी जताई है। उन्होंने प्रयागराज दौरे के दौरान सोमवार को शिक्षा निदेशालय में निरीक्षण और समीक्षा बैठक की।
इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि कोर्ट के आदेश वाले मामलों में संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षक देयकों के भुगतान समय पर सुनिश्चित कराएं। ऐसे प्रकरण शिक्षा निदेशालय को भेजने वाले जिला विद्यालय निरीक्षकों पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।
शिक्षा निदेशालय में अनुभागों के निरीक्षण के दौरान अपर मुख्य सचिव ने पाया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद वेतन, एरियर, पेंशन आदि के भुगतान के मामले वर्ष भर से ज्यादा लटके रहते हैं, जिसके कारण कोर्ट की अवमानना की स्थिति बन जाती है। इसमें शासन स्तर के अधिकारियों तक को तलब किया जाता है। संबंधित शिक्षक व शिक्षणेतर कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से जिला एवं शिक्षा निदेशालय स्तर पर चक्कर लगाना पड़ता है।
इस पर उन्होंने पूछा कि ऐसे मामले में जिला स्तर पर क्यों रोके जाते हैं। बाद में उसे निदेशालय भेजने की प्रवृत्ति भी चिंताजनक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह यह सुनिश्चित कराएं कि ऐसे प्रकरण लंबित न रहें। जो प्रकरण लंबति हैं, उनके संबंध में संबंधित जिला विद्यालयों से स्पष्टीकरण लेते हुए जिम्मेदारी सुनिश्चित करें, ताकि उनके विरुद्ध कार्यवाही की जा सके।
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