सुप्रीम कोर्ट ने डीपफेक‑AI याचिका पर गुजरात हाईकोर्ट की कार्यवाही को रोक दिया
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर फैलते डीपफ़ेक और AI‑जनित सामग्री को लेकर दायर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन की सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट में आगे बढ़ने से रोका। यह कदम तब आया जब केंद्र सरकार ने मामला सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की याचिका पर नोटिस जारी किया, और कोर्ट ने अन्य हाईकोर्टों में चल रहे समान कार्यों पर भी रोक लगाई। साथ ही, कोर्ट ने इंटरमीडियरी कंपनियों को IT नियमों के तहत नोटिसों का शीघ्र जवाब देने और 'सहयोग' पोर्टल से जुड़ने की हिदायत दी।

सौजन्य से:- Live Law Hindi
सुप्रीम कोर्ट ने डीपफेक और AI कंटेंट को रेगुलेट करने की याचिका पर गुजरात हाईकोर्ट की कार्यवाही पर लगाई रोक
Shahadat
12 Sept 2026 9:50 AM IST
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैल रहे डीपफेक और AI-जनरेटेड कंटेंट के बारे में चिंता जताने वाली PIL पर गुजरात हाई कोर्ट के सामने चल रही कार्यवाही पर रोक लगाई।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह आदेश तब दिया, जब केंद्र सरकार ने केस को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की याचिका पर नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान वकील ज़ोहेब हुसैन ने बताया कि कोर्ट ने दूसरे हाईकोर्ट में भी ऐसी ही कार्यवाही पर रोक लगाई और वे मामले अब सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग हैं।
बता दें, अप्रैल में हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज जैसे 'X', मेटा, गूगल, रेडिट आदि को नोटिस जारी किया। उनसे राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा दायर हलफनामों पर जवाब मांगा गया। ये हलफनामे 'सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021' (जिसे संशोधन नियम, 2026 द्वारा संशोधित किया गया) के तहत 'ड्यू डिलिजेंस' (उचित सावधानी) दायित्वों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए कानूनी ढांचे को लागू करने के बारे में थे।
इस बीच, कोर्ट ने इंटरमीडियरीज से कहा कि वे समय पर कार्रवाई और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल के लिए केंद्र के 'सहयोग' (SAHYOG) पोर्टल से जुड़ें।
राज्य सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय के हलफनामों में कही गई बातों का ज़िक्र करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि विचार करने वाला मुद्दा व्यापक जनहित में मौजूदा कानूनी व्यवस्था को सख्ती से लागू करने और एक समान रूप से लागू करने से जुड़ा है, क्योंकि इंटरमीडियरीज के स्तर पर इसके कार्यान्वयन को लेकर चिंताएं जताई गईं।
कोर्ट ने इंटरमीडियरीज से कहा कि वे IT नियमों के तहत "समय-सीमा के भीतर कंटेंट हटाने के दायित्वों" का पालन सुनिश्चित करने के लिए IT Act 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत जारी कानूनी नोटिसों पर "तेज़ी से कार्रवाई/जवाब" दें।
राज्य ने अपने हलफनामे में कुछ सुझाव दिए, जिनमें एक ऐसी पॉलिसी बनाना शामिल है, जो एक मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क प्रदान करे और जांच करने वाली अथॉरिटी और डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच तत्काल तालमेल का सिस्टम अनिवार्य करे। यह कहा गया कि रेगुलेटरी फ्रेमवर्क का उद्देश्य जायज़ अभिव्यक्ति को रोकना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल गैर-कानूनी कंटेंट बनाने और फैलाने के लिए न हो, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है या लोकतांत्रिक संस्थाएं कमज़ोर हो सकती हैं।
केंद्र सरकार ने बताया कि उसने धारा 79(3)(b) और रूल 3(1)(d) के तहत सूचनाएं भेजने के लिए 'सहयोग' (SAHYOG) पोर्टल बनाया। यह पोर्टल अक्टूबर 2024 से काम कर रहा है। यह सभी अधिकृत कानून प्रवर्तन एजेंसियों और मध्यस्थों (Intermediaries) को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाकर तुरंत, समन्वित और समयबद्ध कार्रवाई करने में मदद करता है। इससे गैर-कानूनी रूप से सिंथेटिक तरीके से बनाई गई जानकारी को तेजी से हटाने और दोषी उपयोगकर्ताओं की पहचान के लिए सब्सक्राइबर की जानकारी, लॉग और न्यायिक सबूत हासिल करने में आसानी होती है।
यह भी बताया गया कि उस तारीख तक 524 IT मध्यस्थों को 'सहयोग' पोर्टल से जोड़ा जा चुका था, जिनमें प्रतिवादी नंबर 5 (मेटा) और 6 (गूगल) शामिल थे। हालांकि, प्रतिवादी नंबर 7 (X/पहले ट्विटर) समेत अन्य मध्यस्थ अभी तक पोर्टल से नहीं जुड़े थे या पूरी तरह से एकीकृत नहीं हुए थे, और अक्सर धारा 79(3)(b) के तहत जानकारी हटाने के नोटिस का जवाब देने में विफल रहते हैं।
Case Title : Union of India v. Vikas Vijay Nair and Ors.
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