केंद्र सरकार ने मेटा को दो टूक: सेंसरशिप नहीं, कानून का पालन
केंद्र सरकार ने मेटा की टीम से दो दिन की कड़ी पूछताछ के बाद तकनीकी स्तर पर विस्तृत चर्चा की, जिसमें AI जेनरेटेड हानिकारक कंटेंट और बिना लेबल वाले एआई जेनरेटेड कंटेंट पर कंपनी की कार्ययोजना पर विशेष ध्यान रहा. सरकार ने कंपनी को ठोस कदम उठाकर परिणामों की रिपोर्ट देने को कहा है.

सौजन्य से:- ABP News
'सेंसरशिप नहीं, कानून का पालन', AI कंटेंट-CSAM पर केंद्र की मेटा को दो टूक
केंद्र सरकार ने मेटा की टीम के साथ फिर बैठक की. इसमें यह मुद्दा प्रमुखता से उठा कि निर्देश दिए जाने के बावजूद एआई जेनरेटेड हानिकारक कंटेंट दोबारा सामने आ जाती है और तेजी से फैलती है.
केंद्र सरकार ने मेटा की टीम से दो दिन की कड़ी पूछताछ के बाद शुक्रवार (7 अगस्त 2026) को तकनीकी स्तर पर विस्तृत चर्चा की, जिसमें डीपफेक, बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) और बिना लेबल वाले एआई जेनरेटेड कंटेंट पर कंपनी की कार्ययोजना पर विशेष ध्यान रहा. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मेटा की टीम ने इन समस्याओं से निपटने के तरीकों के बारे में बताया जबकि सरकार ने कंपनी को ठोस कदम उठाकर परिणामों की रिपोर्ट देने को कहा है.
अधिकारियों ने कहा कि फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों का संचालन करने वाली कंपनी की इन मामलों में प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी. बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा कि निर्देश दिए जाने के बावजूद एआई जेनरेटेड हानिकारक कंटेंट दोबारा सामने आ जाती है और तेजी से फैलती है. सरकार ने यह भी पूछा कि आईटी नियमों के बावजूद बिना लेबल वाले एआई ढंग से तैयार वीडियो इस प्लेटफॉर्म पर क्यों बने रहते हैं. सरकार ने ‘कंटेंट मॉडरेशन’ में अधिक मानवीय निगरानी, भारतीय भाषाओं की बेहतर समझ और स्थानीय संदर्भों को ध्यान में रखने की जरूरत पर जोर दिया.
सूत्रों ने कहा कि अगले हफ्ते इन मुद्दों पर एक और बैठक होने की संभावना है. इससे पहले सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दो दिनों की बैठक में मेटा के वैश्विक मामलों के प्रमुख जोएल काप्लान की अगुवाई वाली टीम से कंटेंट एल्गोरिद्म और भारतीय कानूनों के अनुपालन पर सवाल किए थे. तीसरे दिन हुई बैठक में कंपनी के प्रस्तावित उपायों पर तकनीकी रूप से गहराई से चर्चा हुई.
मेटा ने आईटी मंत्रालय के अधिकारियों को अपने सिस्टम की कार्यप्रणाली समझाते हुए कहा कि डीपफेक, सीएसएएम और बॉट्स अकाउंट्स से निपटने के लिए उसके पास समाधान हैं और उन्हें लागू करने की योजना तैयार है. कंपनी ने पहले गंभीर मुद्दों को स्वीकार करते हुए लगातार सुधारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिलाया था. सरकार ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य सेंसरशिप नहीं, बल्कि भारतीय कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करना है. साथ ही, कंपनी पर लगातार दबाव बनाए रखा जाएगा कि वह ठोस और निरंतर सुधार करे.
मेटा के साथ सरकार की यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रोक के बाद बुलाई गई थी. हालांकि मेटा ने प्रधानमंत्री की पोस्ट को एआई आधारित कंटेंट फिल्टर की गलती मानते हुए बहाल कर दिया था और माफी मांगी थी.
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