'ट्रस्ट भंग करो', अशोक गहलोत का राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में निशाना साधा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने ट्रस्ट को टैक्स भंग करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की देखरेख में कराई जानी चाहिए।

सौजन्य से:- Jagran
'तुरंत भंग किया जाए ट्रस्ट...' राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अशोक गहलोत बोले - जांच सुप्रीम कोर्ट के जज से कराई जाए
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने ट्रस्ट को तुरंत भंग करने और सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की देखरेख में जांच कराने की ...और पढ़ें
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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में भले ही मंदिर ट्रस्ट ने सोमवार को आरोपों में घिरे ट्रस्ट के पदाधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार करके और उनकी जगह नए लोगों की नियुक्ति करके इस मामले को शांत करने की कोशिश की है, लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस विवाद को और हवा दी है।
उन्होंने कहा कि मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी से लोगों की आस्था पर जिस तरह से चोट पहुंची है, उनमें मंदिर ट्रस्ट को तुरंत भंग करना चाहिए। साथ ही चढ़ावा चोरी मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की देखरेख में कराई जानी चाहिए।
गहलोत ने ट्रस्ट भंग करने की मांग की
कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने कहा कि जिस तरह अविश्वास पैदा हुआ है, उससे ट्रस्ट को भंग कर देना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष ने खुद कहा कि यह चोरी नहीं बल्कि डकैती है।
भाजपा और आरएसएस भी मान रहे कि गड़बड़ी हुई है तो फिर बचा क्या है। इसलिए इस ट्रस्ट को तुरंत भंग किया जाए। उन्होंने मामले की जांच कर रही एसआइटी पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित की गई एसआइटी पर लोगों को भरोसा नहीं है। वह बड़े लोगों को बचा रही है।
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उन्होंने कहा कि जिस तरह से चुनाव आयोग ने चुनावी चंदे की पूरी जानकारी सार्वजनिक की थी, उसी तरह मंदिर के दानदाताओं की सूची भी सार्वजनिक की जाए। वैसे भी मंदिर के निर्माण में सभी राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने दान दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश करें जांच
मंदिर निर्माण के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री रहते मदद की। गहलोत ने कहा कि जब राम मंदिर का निर्माण हो रहा था तब चंपत राय राजस्थान के भरतपुर से गैर कानूनी खदानों से पत्थर लेकर जा रहे थे।
उस समय मैंने उनसे कहा था कि मंदिर निर्माण में गैर कानूनी खदानों के पत्थर नहीं लगाने चाहिए। बाद में यह पूरा मामला पीएमओ तक पहुंचा और भरतपुर के बंसी पहाड़ को लीगल माइनिंग घोषित की गई और तब यहां से पत्थर वहां पहुंचा और राम मंदिर का निर्माण हुआ। इसके बाद भी इन लोगों ने हमें धन्यवाद तक नहीं दिया।
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