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हाई कोर्ट ने आयुष फ़ार्मासिस्टों को समान वेतन का आदेश, 2006 से लागू करवाई वेतनमान

हाई कोर्ट ने 'समान काम, समान वेतन' के सिद्धांत के आधार पर आयुष विभाग के फ़ार्मासिस्टों को स्वास्थ्य विभाग के ग्रेड‑2 फ़ार्मासिस्टों के समान वेतन (₹5,200‑₹20,200 + ₹2,400 ग्रेड पे) देने का आदेश दिया। राज्य सरकार को आदेश लागू करने के लिए चार महीने का समय दिया गया और कोर्ट ने विभागीय अंतर के कारण हुए वेतनभेद को संविधान के अनुच्छेद 14 और 39(D) का उल्लंघन बताया।

2 सितंबर 2026 को 01:32 am बजे
हाई कोर्ट ने आयुष फ़ार्मासिस्टों को समान वेतन का आदेश, 2006 से लागू करवाई वेतनमान

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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वंचित करने कोई आधार नहीं: हाई कोर्ट

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लीगल रिपोर्टर| बिलासपुर

हाई कोर्ट ने 'समान काम, समान वेतन' के सिद्धांत को सर्वोपरि मानते हुए आयुष विभाग में कार्यरत फार्मासिस्टों (आयुर्वेद) को बड़ी राहत दी है। जस्टिस बिभू दत्त गुरु की सिंगल बेंच ने राज्य शासन को आदेश दिया है कि फार्मासिस्टों को भी स्वास्थ्य विभाग के फार्मासिस्ट ग्रेड-2 की तर्ज पर 1 अप्रैल 2006 से 5200-20200 रु. का वेतनमान व 2400 रुपए का ग्रेड पे दें। हाई कोर्ट ने 4 माह का समय दिया है।

आयुष विभाग में कार्यरत हरबंश लाल कुर्रे और अन्य फार्मासिस्टों ने हाईकोर्ट में कई याचिकाएं लगाई थीं। पैरवी अधिवक्ता गौतम खेत्रपाल और रेशम लाल जायसवाल ने की। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति पहले कंपाउंडर के पद पर हुई थी, लेकिन 21 मई 2004 को शासन ने योग्यता रखने वाले कंपाउंडरों को फार्मासिस्ट ग्रेड-2 पर पदनामित कर दिया था।

2009 के वेतन पुनरीक्षण नियमों के तहत स्वास्थ्य विभाग के फार्मासिस्ट ग्रेड-2 को 1 अप्रैल 2006 से 5200-20200 का वेतनमान और 2400 का ग्रेड पे देना शुरू कर दिया। लेकिन, आयुष के फार्मासिस्टों को यह लाभ 1 जनवरी 2016 से दिया गया। शासन के उन आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिनमें 2006 से एरियर्स और वेतनमान देने से इनकार कर दिया था।

हाई कोर्ट ने कहा कि जब शासन ने खुद याचिकाकर्ताओं को 1 जनवरी 2016 से 2400 रुपये का ग्रेड पे देने की बात स्वीकार कर ली है, तो उन्हें 1 अप्रैल 2006 के लाभ से वंचित करने का कोई तार्किक आधार नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 'जगजीत सिंह' मामले का भी जिक्र किया। इसके अलावा तर्क दिया कि आयुष विभाग और स्वास्थ्य विभाग के फार्मासिस्टों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और काम की प्रकृति एक समान है। ऐसे में केवल विभाग अलग होने के आधार पर वेतनमान में भेदभाव करना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और 39(डी) (समान कार्य के लिए समान वेतन) का खुला उल्लंघन है।

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